हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर (जू सफारी) परियोजना एक बार फिर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई गति देते हुए निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल ने करीब 412 हेक्टेयर भूमि का सैटेलाइट आधारित उन्नत तकनीक से सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इसके साथ ही एजेंसी ने लगभग 270 करोड़ रुपये की लागत वाली प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) वन विभाग को सौंप दी है। वन विभाग ने इस रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई के लिए इसे शासन स्तर पर भेज दिया है।
ब्रिडकुल के अधिकारियों के अनुसार, शासन से पीपीआर को मंजूरी मिलते ही परियोजना लागत का दो प्रतिशत, यानी करीब 5.4 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। इस राशि से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। एजेंसी का लक्ष्य अगस्त के अंत तक डीपीआर तैयार कर शासन को सौंपने का है, ताकि निर्माण कार्य की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके।
गौरतलब है कि इस परियोजना की आधारशिला अक्टूबर 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। शुरुआत में इसे अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर नाम दिया गया था, जिसे बाद में बदलकर जू सफारी कर दिया गया। परियोजना के तहत 14.52 करोड़ रुपये की लागत से 13 किलोमीटर लंबी चारदीवारी भी बनाई जा चुकी है।
हालांकि, वर्ष 2021 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कुछ आपत्तियां जताते हुए परियोजना पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2022 में मंत्रालय ने इस शर्त के साथ मंजूरी दी कि किसी भी वन्यजीव कॉरिडोर को प्रभावित नहीं किया जाएगा। वर्ष 2024 में डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी ब्रेथेवट कंपनी को सौंपी गई थी, लेकिन धनराशि उपलब्ध न होने से काम आगे नहीं बढ़ सका।
मई 2026 में शासन ने पुरानी एजेंसी को हटाकर ब्रिडकुल को परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी। अब नई एजेंसी की सक्रियता से उम्मीद बढ़ गई है कि वर्षों से फाइलों में अटकी गौलापार जू सफारी परियोजना जल्द धरातल पर उतर सकेगी।

