वर्षों तक बर्फबारी के कारण दुनिया से कट जाने वाला लद्दाख अब स्थायी और सुरक्षित संपर्क की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच बन रही जोजिला सुरंग न केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का प्रतीक भी बन गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और सुरक्षित हो जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सुरंग उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आएगी। पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी, वहीं सेना की आवाजाही भी हर मौसम में सुगम हो सकेगी।

कश्मीर से लद्दाख को जोड़ने वाला जोजिला दर्रा हर साल भारी बर्फबारी के कारण कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जोजिला सुरंग को क्षेत्र के विकास की नई जीवनरेखा माना जा रहा है। इसी महत्वाकांक्षी परियोजना का जायजा लेने सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari सोनमर्ग पहुंचे।
निरीक्षण के दौरान गडकरी ने सुरंग निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जोजिला सुरंग केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि देश की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह ऐसा सपना है जो कश्मीर घाटी को देश के सुदूर दक्षिणी छोर कन्याकुमारी से मजबूत संपर्क प्रदान करने की दिशा में साकार हो रहा है।
गडकरी ने कहा कि सुरंग बनने के बाद लद्दाख को वर्षभर सड़क संपर्क मिलेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, परिवहन लागत घटेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और आधुनिक सड़क नेटवर्क के माध्यम से देश के दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य चल रहे हैं। प्रदेश में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से 19 सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि पर्यटन और निवेश की संभावनाओं को भी नया विस्तार मिलेगा।
जोजिला सुरंग रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह सुरंग सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हर मौसम में निर्बाध पहुंच उपलब्ध कराएगी। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं और तेज संपर्क मिल सकेगा।
केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास की नई आधारशिला माना जा रहा है। सुरंग के पूरा होने के बाद हिमालय के दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सफर आसान होगा और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद और मजबूत होगी।
16.5 किमी लंबी सुरंग से कश्मीर-लद्दाख के बीच घटेगी दूरी
जोजिला सुरंग लगभग 16.5 किलोमीटर लंबी होगी और इसके पूरा होने के बाद श्रीनगर, सोनमर्ग, द्रास और लेह के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। वर्तमान में जोजिला दर्रे से होकर गुजरने वाला मार्ग भारी बर्फबारी के कारण हर साल कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का संपर्क प्रभावित होता है। सुरंग बनने के बाद यह मार्ग वर्षभर खुला रहेगा और लोगों को मौसम की मार नहीं झेलनी पड़ेगी।
सुरंग के चालू होने पर जोजिला दर्रे को पार करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। जहां खराब मौसम में इस मार्ग को पार करना जोखिम भरा और कई घंटों का सफर होता है, वहीं सुरंग के जरिए यात्रा अपेक्षाकृत सुरक्षित और तेज होगी। इससे श्रीनगर से कारगिल और आगे लेह तक माल ढुलाई तथा यात्री परिवहन को भी बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही देश की सामरिक क्षमता भी मजबूत होगी और लद्दाख को हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से निर्बाध संपर्क मिल सकेगा।

