उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और प्रसिद्ध हिल स्टेशनों के साथ अब हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग को पर्यटन का नया केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के दो प्रमुख ट्रेकिंग रूटों को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार को करीब 15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें पिथौरागढ़ का 61.5 किलोमीटर लंबा राथन खारक ट्रेक और टिहरी-रुद्रप्रयाग क्षेत्र का 44 किलोमीटर लंबा पनवाली कंथा ट्रेक शामिल है।
सरकार की योजना दोनों ट्रेकिंग रूटों को छह-छह दिन के सर्किट के रूप में विकसित करने की है। इन मार्गों पर ट्रेकर्स समुद्र तल से करीब 12,900 से 13,002 फीट तक की ऊंचाई पर पहुंचेंगे। ऊंचाई वाले इन ट्रेकिंग रूटों से पर्यटकों को हिमालय की कई भव्य चोटियों के शानदार नजारे देखने का अवसर मिलेगा। इनमें नंदा देवी, त्रिशूल, हरदेओल, बंदरपुंछ, काला नाग और चौखंबा जैसी प्रमुख हिमालयी चोटियां शामिल हैं।
इन ट्रेकिंग रूटों को विकसित करने का उद्देश्य केवल साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि इसके जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना है। योजना के तहत ट्रेकिंग रूट से जुड़े आसपास के गांवों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ा जाएगा। स्थानीय लोगों के लिए होमस्टे, गाइड, पोर्टर, भोजन और परिवहन जैसी सेवाओं में रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को पर्यटकों तक पहुंचाने और उनकी बिक्री को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए साधन विकसित होने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग को व्यवस्थित रूप से विकसित करने से उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। साथ ही पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ पर्वतीय गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

