भारतीय खेल जगत से शुक्रवार को एक ऐसी दुखद खबर सामने आई जिसने करोड़ों खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया। देश के महान निशानेबाज, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कोच और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल भारतीय शूटिंग बल्कि पूरे खेल जगत को गहरा आघात पहुंचा है। उत्तराखंड की धरती से निकलकर विश्व मंच पर भारत का परचम लहराने वाले जसपाल राणा ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण से खेल इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
जानकारी के अनुसार, जर्मनी के म्युनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय विमान में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी हालत को देखते हुए आवश्यक उपचार शुरू किया। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के एक सूत्र के अनुसार, विमान यात्रा के दौरान ही उन्हें असहज महसूस होने लगा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने उनके हृदय में स्टेंट भी डाला, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शुक्रवार, 12 जून 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाई। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों को मिलाकर कुल 23 पदक अपने नाम किए थे। एशियाई खेलों में उन्होंने चार स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके खाते में नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक दर्ज हैं। लगातार चार कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
सिर्फ खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षक के रूप में भी जसपाल राणा का योगदान बेहद उल्लेखनीय रहा। पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली स्टार शूटर मनु भाकर सहित कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उन्होंने तराशा। फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल वर्ग के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था। उनके मार्गदर्शन में भारतीय शूटिंग ने नई ऊंचाइयों को छुआ।
28 जून 1976 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के चिल्ला गांव में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। उनके पिता नारायण सिंह राणा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में अधिकारी थे। जसपाल ने मात्र 12 वर्ष की आयु में 1988 में अपनी पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और यहीं से उनके शानदार करियर की शुरुआत हुई। 18 वर्ष की उम्र में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने वाले वह देश के सबसे युवा सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल रहे।
उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक नेताओं और खेल हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जसपाल राणा ने अपने असाधारण प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया और एक मार्गदर्शक के रूप में युवा प्रतिभाओं को निखारने में अमूल्य योगदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारतीय खेल जगत की बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का उनका समर्पण सदैव याद रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से उत्तराखंड और देश का नाम विश्वभर में रोशन किया। उनका निधन राज्य, खेल जगत और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
जसपाल राणा भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी उपलब्धियां, उनका संघर्ष, उनका अनुशासन और भारतीय शूटिंग को नई दिशा देने वाला उनका योगदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

