केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल्द बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद का विस्तार और पुनर्गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन की नई टीम का भी ऐलान होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस कवायद के जरिए सरकार और संगठन दोनों में नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को धार दी जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व ने संगठन के नए पदाधिकारियों की सूची लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पार्टी युवा नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने के साथ-साथ कुछ केंद्रीय मंत्रियों को संगठन में भेज सकती है, जबकि संगठन के कुछ पदाधिकारियों को मोदी सरकार में शामिल किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा कई मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।
सरकार के भीतर यह धारणा बन रही है कि कुछ प्रमुख मंत्रालयों में नए नेतृत्व की जरूरत है। वहीं आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों को मंत्रिमंडल में अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन के बाद वहां से भी कुछ सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बागी नेताओं को भी मंत्री पद मिलने की अटकलें हैं।
इस बीच ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत उत्तर प्रदेश और दिल्ली भाजपा की जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा के मंत्रिपद छोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं जॉर्ज कुरियन राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि रवनीत सिंह बिट्टू का मंत्री पद फिलहाल बरकरार है।
मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को उस समय और बल मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इसके दो दिन बाद गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि, सरकार या भाजपा की ओर से अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

