प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के दौरे पर हैं। नीदरलैंड के बाद वह स्वीडन पहुंचने वाले हैं। स्वीडन में पीएम मोदी के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बीच स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने और लोगों के बीच जुड़ाव को गहरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अनुराग भूषण ने कहा कि स्वीडन में रहने वाला भारतीय समुदाय इस दौरे को लेकर काफी उत्साहित है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गोथेनबर्ग दौरे को बताया ऐतिहासिक
अनुराग भूषण ने कहा, “प्रधानमंत्री आज स्वीडन पहुंचेंगे। वे स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के निमंत्रण पर आ रहे हैं। इस दौरान वे प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन और उनकी टीम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री स्वीडन की बिजनेस कम्युनिटी से भी मुलाकात करेंगे और यूरोपियन राउंडटेबल ऑफ इंडस्ट्री के सदस्यों को संबोधित करेंगे, जिसमें यूरोप की शीर्ष कंपनियां शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह गोथेनबर्ग में हो रहा है। किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का इस ऐतिहासिक और औद्योगिक शहर का यह पहला दौरा होगा। भूषण ने बताया कि गोथेनबर्ग स्वीडन का तकनीक, उद्योग और नवाचार का प्रमुख केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय भी रहता है।
भारत-स्वीडन आर्थिक साझेदारी पर जोर
भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध काफी पुराने और बहुआयामी हैं। विशेष रूप से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत में 300 से अधिक स्वीडिश कंपनियां काम कर रही हैं, जो करीब 4 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। वहीं, स्वीडन में 75 भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारतीय, स्वीडिश और यूरोपीय उद्योगों के बीच सहयोग और निवेश के नए अवसर पैदा करेगी। भूषण के मुताबिक स्वीडन नवाचार और सतत विकास के लिए दुनिया भर में जाना जाता है और यही दोनों देशों की साझेदारी का प्रमुख आधार बन चुका है।
ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में बढ़ेगा सहयोग
अनुराग भूषण ने कहा कि 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच इनोवेशन आधारित साझेदारी को नई दिशा मिली थी। उन्होंने कहा कि ग्रीन टेक्नोलॉजी, सर्कुलर इकॉनमी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
भूषण ने बताया कि इस साल आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में 80 से अधिक स्वीडिश कंपनियों ने हिस्सा लिया था, जो दूसरा सबसे बड़ा विदेशी प्रतिनिधिमंडल था। इसमें बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप और मिड-साइज कंपनियां भी शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि भारत का विशाल बाजार और सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्मार्ट सिटीज’ जैसी पहलें स्वीडिश कंपनियों के लिए बड़े अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा स्वीडिश उद्योगों को भारत में निवेश और सहयोग के लिए और अधिक प्रेरित करेगा

