हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों, किसानों, युवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर आम लोगों को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में ऐसे अनेक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनका सीधा प्रभाव प्रदेश के हजारों परिवारों पर पड़ेगा। कैबिनेट ने जहां किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए नई ब्याज अनुदान योजना शुरू करने का निर्णय लिया, वहीं स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भर्तियों का रास्ता भी साफ कर दिया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए हैं।
मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों द्वारा पूर्व में अस्वीकृत किए गए अनुकंपा नियुक्ति मामलों की दोबारा समीक्षा करने को मंजूरी दी है। सरकार ने एकमुश्त विशेष व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों पर पुनर्विचार का निर्णय लिया है, जिनमें मानवीय आधार पर राहत देने की आवश्यकता महसूस की गई है। इसके लिए आवश्यक नियमों में छूट भी प्रदान की जाएगी ताकि पात्र परिवारों को न्याय मिल सके।
बैठक में भूमिहीन परिवारों और सीमांत किसानों को बड़ी राहत देते हुए सरकारी भूमि पर कुछ अतिक्रमणों के नियमितीकरण नीति-2026 को मंजूरी प्रदान की गई। यह नीति उन लोगों को राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई है जो वर्षों से सरकारी भूमि पर आवास, कृषि अथवा बागवानी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि नीति सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है और इसे अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय से हजारों परिवारों को स्थायित्व और सुरक्षा मिलेगी।
किसानों को आर्थिक संकट से उबारने की पहल
प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए मंत्रिमंडल ने कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू करने का फैसला लिया है। योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए बनाई गई है जिनकी भूमि कृषि ऋण के कारण नीलामी के खतरे में पहुंच गई है। इसके तहत तीन लाख रुपये तक के पात्र कृषि ऋणों पर लगने वाले ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से प्रदेश के 6,356 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव को देखते हुए इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए भी मंत्रिमंडल ने व्यापक भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 300 मेडिकल ऑफिसर, 200 स्टाफ नर्स, 250 मल्टी टास्क वर्कर तथा 162 अन्य पद भरे जाएंगे। अन्य पदों में 76 ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, 36 रेडियोग्राफर और 50 लैब तकनीशियन ग्रेड-2 शामिल हैं। इन नियुक्तियों से अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 75 सहायक प्रोफेसरों के पद सृजित कर उन्हें भरने की मंजूरी दी गई है। मंडी जिले के नेरचौक स्थित मेडिकल संस्थान में कार्डियोलॉजी विभाग को मजबूत करने के लिए भी चार नए पदों को स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती मिलेगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने भर्ती निदेशालय के माध्यम से 400 वर्क इंस्पेक्टर पद भरने की मंजूरी दी है। इसके अलावा विभिन्न विभागों में 17 सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन भर्तियों से प्रदेश के शिक्षित युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा।
कर्मचारियों के हित में कई फैसले
राज्य सरकार ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं, पूर्व में अध्ययन अवकाश का लाभ ले चुके कर्मचारियों को भी बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। इस फैसले को कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल ने अंशकालिक कर्मचारियों को भी राहत प्रदान करते हुए निर्णय लिया कि 31 मार्च 2026 तक सात वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी बनाया जाएगा। लंबे समय से इस मांग को लेकर कर्मचारी संगठन सरकार के समक्ष अपनी बात रख रहे थे।
इसके साथ ही जॉब ट्रेनीज को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कार्यस्थल पर बेहतर सामाजिक वातावरण तैयार होगा और कर्मचारियों को पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में सहायता मिलेगी। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की यह बैठक किसानों, कर्मचारियों, युवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण सौगातें लेकर आई है। सरकार के इन फैसलों को प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा, रोजगार सृजन और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

