नई दिल्ली। पासपोर्ट को भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण मानने को लेकर बढ़ती गलतफहमियों के बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और विदेशों में व्यक्ति की पहचान स्थापित करना है।
पासपोर्ट एवं मोबिलिटी इकोसिस्टम पर आयोजित विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने कहा कि कई बार सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विभिन्न कानूनी मामलों में पासपोर्ट को नागरिकता के निर्णायक प्रमाण के रूप में देखा जाता है, जबकि इसकी कानूनी स्थिति इससे अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकता से जुड़े मामलों में संबंधित कानूनों और निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर ही निर्णय लिया जाता है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पहचान, पते और अन्य आवश्यक विवरणों का सत्यापन किया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया नागरिकता के अंतिम निर्धारण का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष केवल पासपोर्ट के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि समय-समय पर आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों को भी नागरिकता के प्रमाण के रूप में पेश किए जाने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होती रही है। सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि अलग-अलग दस्तावेजों का उद्देश्य अलग होता है और उन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
इस अवसर पर विदेश मंत्रालय ने देश में पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण की जानकारी भी साझा की। 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में देश का पासपोर्ट सेवा नेटवर्क छह गुना तक बढ़ चुका है। सरकार ने पासपोर्ट सेवाओं को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल प्रक्रियाओं, ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था, पासपोर्ट सेवा केंद्रों के विस्तार और डाकघरों के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने जैसी पहलों के कारण अब नागरिकों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक तरीके से पासपोर्ट मिल पा रहा है। सरकार का लक्ष्य देश के हर क्षेत्र तक पासपोर्ट सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना और आवेदकों को कम समय में बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

