सरकार सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत, जिन ड्राइवरों का ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड रहा है, उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस (DL) का रिन्यूअल कराने से पहले दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना अनिवार्य हो सकता है।
इसके साथ ही, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) को सड़क हादसों के पीड़ितों और उनके परिजनों को अंतिम फैसले से पहले अंतरिम मुआवजा देने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि उन्हें राहत के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
करीब दो वर्षों तक राज्यों और संबंधित मंत्रालयों के साथ चर्चा के बाद इन संशोधनों को हाल ही में रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने पेश किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, पैनल ने मंत्रालय को विधेयक को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है और इसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
प्रस्तावों का उद्देश्य लापरवाह ड्राइविंग पर रोक लगाना, बिना बीमा वाले वाहनों के उपयोग को कम करना और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर राहत उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, बार-बार नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द होने पर तीन साल तक नया लाइसेंस जारी नहीं करने का भी प्रस्ताव है।
सरकार मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता की उम्र 40 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने पर भी विचार कर रही है। वहीं, 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ लेकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है, हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने इस पर दुरुपयोग की आशंका जताई है।

