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October 17, 2026
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नेताजी का अनोखा ठिकाना : गिरफ्तारी से बचने के लिए साड़ियों के ढेर में छिप गए नेताजी, पुलिस ने खोज निकाला तो सब रह गए हैरान, वीडियो



पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा, भ्रष्टाचार और कथित आपराधिक मामलों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य के विभिन्न जिलों से सामने आ रही घटनाएं न केवल प्रशासनिक सख्ती की तस्वीर पेश कर रही हैं, बल्कि कई जगहों पर जनता के बढ़ते असंतोष को भी उजागर कर रही हैं। हाल के दिनों में कई टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।



ताजा मामला हावड़ा जिले के आमता क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में पुलिस ने तृणमूल कार्यकर्ता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह एक घर में साड़ियों के ढेर के नीचे छिपा हुआ था। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसे खोज निकाला और हिरासत में ले लिया। भाजपा नेताओं का दावा है कि उसके खिलाफ चुनाव बाद हिंसा से संबंधित शिकायतें लंबे समय से लंबित थीं और कार्रवाई में देरी हो रही थी।



इससे पहले कूचबिहार जिले के माथाभांगा क्षेत्र में भी एक तृणमूल नेता को पुलिस ने बिस्तर के नीचे छिपे होने के दौरान गिरफ्तार किया था। इन घटनाओं को विपक्ष राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के मामलों से जोड़कर देख रहा है।

वहीं पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी से तृणमूल के पूर्व विधायक सुकुमार हाजरा को एक महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में पहले से विवाद का माहौल था और शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। मामले की जांच जारी है।

दूसरी ओर, कोलकाता नगर निगम के प्रभावशाली पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को कथित वसूली के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। उनकी गिरफ्तारी ने कोलकाता की राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

उधर, नदिया जिले के नवद्वीप में नगरपालिका चेयरमैन बिमल कृष्ण साहा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में पेयजल, सफाई व्यवस्था और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं की स्थिति लंबे समय से खराब है। इसी नाराजगी के चलते लोगों ने सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ प्रदर्शन किया, “चोर-चोर” के नारे लगाए और अंडे फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया।

राज्य में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर पुलिस और जांच एजेंसियां विभिन्न मामलों में कार्रवाई कर रही हैं, तो दूसरी ओर जनता भी स्थानीय मुद्दों को लेकर खुलकर विरोध जता रही है। ऐसे में आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं, जबकि विपक्ष इन घटनाओं को सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए एक बड़े मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

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