दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल निवासी केशव नेगी की गिरफ्तारी का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हादसे में कई लोगों की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल में रसोइये के रूप में कार्यरत केशव नेगी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड में व्यापक जनभावना देखने को मिली और प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और बदरीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला सहित कई जनप्रतिनिधियों ने केशव नेगी के पक्ष में आवाज उठाई और कहा कि किसी कर्मचारी को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल अधिकारियों से जानकारी ली, बल्कि केशव नेगी के परिजनों से भी संवाद किया। बताया गया कि मुख्यमंत्री ने केशव नेगी के बच्चों और परिवार के सदस्यों से फोन पर बात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। धामी ने कहा कि यदि केशव नेगी निर्दोष हैं तो उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा और उत्तराखंड सरकार इस मामले में हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने अधिकारियों को दिल्ली प्रशासन के संपर्क में रहने और मामले की पूरी जानकारी जुटाने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी हादसे की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति घटना स्थल पर कार्यरत था, उसे पूरे मामले का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि होटल की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन मानकों का पालन, भवन की स्वीकृतियां और प्रबंधन की भूमिका जैसे सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी केशव नेगी के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि एक कर्मचारी पर पूरी जिम्मेदारी डालने का प्रयास किया जा रहा है। रावत ने कहा कि होटल संचालन की जिम्मेदारी मालिक और प्रबंधन की होती है तथा सुरक्षा मानकों की निगरानी भी संस्थान की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड का एक मेहनतकश युवक देश की राजधानी में रोजगार के लिए गया था और यदि वह केवल अपनी ड्यूटी कर रहा था तो उसके साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने केंद्र और दिल्ली प्रशासन से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें केशव नेगी के परिवार और स्थानीय लोगों से लगातार जानकारी मिल रही है। बलूनी ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बात कर पूरे मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्याय का मूल सिद्धांत यह है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका नहीं है तो उसे केवल दबाव या परिस्थितियों के कारण आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।
बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड के हजारों युवा देशभर में होटल, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में काम करते हैं। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में कार्रवाई से कई परिवार प्रभावित होते हैं। इसलिए जांच एजेंसियों को हर पहलू की गहराई से पड़ताल करनी चाहिए।
वहीं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी केशव नेगी के समर्थन में आवाज बुलंद की। नेताओं का कहना है कि जिस होटल में आग लगी, वहां फायर सेफ्टी व्यवस्था, आपातकालीन निकास, सुरक्षा उपकरणों और प्रशासनिक अनुमतियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में केवल एक रसोइये की गिरफ्तारी से पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
घटनाक्रम के अनुसार दिल्ली के होटल में भीषण आग लगने से कई लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और इसी क्रम में केशव नेगी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में चिंता का माहौल बन गया। परिजनों ने दावा किया कि केशव नेगी एक साधारण कर्मचारी हैं और होटल के संचालन या सुरक्षा प्रबंधन से उनका कोई संबंध नहीं था।
अब यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड के सम्मान, प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और न्यायिक निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और अन्य नेताओं की सक्रियता के बाद मामले पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस दुखद अग्निकांड के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है और क्या केशव नेगी की गिरफ्तारी उचित थी या नहीं।

