स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। ध्वजारोहण के बाद अपने 13वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में उन्होंने पिछले 12 वर्षों में गैस आपूर्ति, सौर ऊर्जा और रेलवे विद्युतीकरण समेत कई क्षेत्रों में हुए बदलावों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत पहले से की गई तैयारियों और आत्मनिर्भरता की नीति के कारण मजबूती से खड़ा रहा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले देश के करीब 70 शहरों में ही पाइप से गैस पहुंचती थी, जो अब बढ़कर लगभग 700 शहरों तक पहुंच गई है। पहले जहां करीब 20 से 22 लाख घरों में पाइप वाली गैस की सुविधा थी, वहीं अब यह संख्या करीब 1.75 करोड़ घरों तक पहुंच चुकी है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री के मुताबिक करीब 12 वर्ष पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट तक पहुंच गई है। आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए शुरू की गई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख घरों में सौर ऊर्जा अपनाने का लक्ष्य भी हासिल किया जा चुका है।
रेलवे विद्युतीकरण का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1925 में यह प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन लगभग नौ दशकों में नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही विद्युतीकृत हो पाया। इसके विपरीत पिछले एक दशक में करीब 70 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में भारत ने 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लगातार विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी अवधि में कोरोना महामारी, यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे गंभीर वैश्विक संकट भी सामने आए। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के दौरान कुछ लोग देश में भय और चिंता का माहौल बनाने की कोशिश करते रहे।
उन्होंने कहा कि कोरोना के समय टीकों की उपलब्धता और लोगों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं जताई गईं, जबकि पश्चिम एशिया में संकट के दौरान पेट्रोल, गैस, डीजल और खाद की उपलब्धता को लेकर भी कई तरह की बातें कही गईं। इसके बावजूद भारत की पहले से की गई तैयारियों ने संकट के समय देश को संभालने में मदद की।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के फैसले को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया था, तब वैश्वीकरण को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने दिखा दिया है कि देशों के लिए अपने संसाधनों और जरूरी आपूर्ति की सुरक्षा कितनी अहम है।
उन्होंने कहा कि आज पेट्रोल, गैस, यूरिया और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने में भारत की अपनी क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री ने संसाधनों को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम, खाद, दवाइयों, तकनीकी चिप और अन्य जरूरी संसाधनों को लेकर वैश्विक निर्भरता संकट के समय बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे दौर में पिछले एक दशक की आत्मनिर्भरता की दिशा में की गई तैयारी भारत की बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

