उत्तराखंड में मानसून के दूसरे दिन भी बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार देर रात से प्रदेश के लगभग सभी जिलों में लगातार बारिश हो रही है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन, मलबा और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इसका असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। प्रदेशभर में 52 से अधिक मुख्य और ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। संबंधित विभाग सड़कें खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं।
सबसे अधिक असर बागेश्वर जिले में देखने को मिला है, जहां कुल 14 सड़कें बंद हैं। इनमें 5 लोक निर्माण विभाग (PWD) और 9 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के मार्ग शामिल हैं। टिहरी में 13 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं, जबकि पिथौरागढ़ में 10 सड़कें अवरुद्ध हैं। इनमें 2 पीडब्ल्यूडी और 8 पीएमजीएसवाई के मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा देहरादून और चमोली में 5-5 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। पौड़ी और रुद्रप्रयाग में 2-2 सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि चंपावत में 1 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद होने की सूचना है।
राजधानी देहरादून में लगातार दूसरे दिन रिस्पना नदी उफान पर बह रही है। मालदेवता क्षेत्र में भारी बारिश के कारण सड़क पर मलबा आ गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित रहा। प्रशासन ने मलबा हटाकर मार्ग को सुचारु करने का कार्य शुरू कर दिया है।
वहीं पिथौरागढ़ जिले के झूलाघाट क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के चलते काली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर बागेश्वर में बारिश के बाद मलबा, बड़े बोल्डर और पेड़ सड़क पर गिरने से पुडकुनी–चलकाना मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। इससे कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न जाने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। साथ ही संबंधित विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

