छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में अटका मानसून, बारिश में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता और गर्मी से बेहाल जनजीवन - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
July 29, 2026
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छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में अटका मानसून, बारिश में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता और गर्मी से बेहाल जनजीवन



देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार थम सी गई है। सामान्य तौर पर जून के मध्य तक जिस मानसून को छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेजी से सक्रिय हो जाना चाहिए था, वह पिछले कई दिनों से लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, वहीं आम लोगों को भी गर्मी से राहत मिलने का इंतजार लंबा हो गया है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के आगे बढ़ने के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से पर्याप्त मात्रा में नमी मिलना जरूरी होता है। फिलहाल वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं, जिसके कारण मानसूनी हवाओं की गति कमजोर पड़ गई है। नतीजतन मानसून छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों तक पहुंचने के बाद आगे बढ़ने में संघर्ष कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर कृषि गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और खरीफ फसलों की बुवाई मानसून की बारिश पर टिकी होती है। कई जिलों में किसान खेतों की तैयारी तो कर चुके हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान समेत कई फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। दिन के समय तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जबकि रात में भी राहत नहीं मिल रही। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अभी अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार है। हालांकि कहीं-कहीं स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन इन्हें मानसून की सक्रिय बारिश नहीं माना जा सकता।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून का कुछ दिनों तक रुकना कोई असामान्य घटना नहीं है। कई बार समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण मानसून की प्रगति धीमी पड़ जाती है। इसके बाद जब अनुकूल सिस्टम विकसित होते हैं तो मानसून फिर से सक्रिय होकर तेजी से आगे बढ़ता है। वर्तमान में भी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बंगाल की खाड़ी में जल्द ही एक नया मौसम तंत्र विकसित हो सकता है, जिससे मानसूनी हवाओं को मजबूती मिलेगी।

इस बीच किसानों और आम जनता की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। कृषि क्षेत्र को जहां अच्छी बारिश का इंतजार है, वहीं शहरों में रहने वाले लोग भी उमस और गर्मी से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में परिस्थितियां धीरे-धीरे बेहतर हो सकती हैं और मानसून फिर से रफ्तार पकड़कर छत्तीसगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। तब तक दोनों राज्यों को गर्मी, उमस और बारिश के इंतजार के दौर से गुजरना पड़ेगा।

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