उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) पेपर लीक मामले के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में परीक्षा संचालन से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही, अनियमितता या पेपर लीक की घटना पर सीधे विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके तहत कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक की जवाबदेही तय की जाएगी तथा आवश्यक होने पर उनके खिलाफ नकल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।
बुधवार को विधानसभा में आयोजित तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी तकनीकी संस्थानों में परीक्षा प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालयों की होगी। परीक्षा प्रणाली को इस प्रकार विकसित किया जाए कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा की निष्पक्षता और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता हर हाल में बनी रहे।
मंत्री ने कहा कि यूटीयू पेपर लीक प्रकरण ने परीक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को उजागर किया है। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत और भरोसेमंद परीक्षा तंत्र विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से तकनीकी उपायों को अपनाने, सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने और प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा संपन्न कराने तक की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी कहा गया कि छात्रों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में परीक्षा से जुड़ी किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य राज्य की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में छात्रों और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करना तथा परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
सरकार के इस फैसले को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

