उत्तराखंड को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नवाचार और तकनीकी विकास का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य के युवाओं, शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े विद्यार्थियों को नई तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को राजभवन में ‘आरोही एआई इनक्यूबेटर’ और एआई न्यूज़लेटर का औपचारिक शुभारंभ किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने इस पहल को उत्तराखंड के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि यह मंच युवाओं के नवाचारों को प्रयोगशाला से निकालकर उद्योग और स्टार्टअप की दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि विकास और परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। ऐसे में उत्तराखंड भी इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा और नवाचार की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही दिशा, संसाधन और मंच उपलब्ध कराने की है। ‘आरोही एआई इनक्यूबेटर’ इसी उद्देश्य को पूरा करेगा और नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में एआई को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया है। इसकी शुरुआत राजभवन में एआई लैब की स्थापना से हुई, जहां नई तकनीकों और नवाचारों पर प्रयोग शुरू किए गए। इसके बाद एआई-सक्षम मोबाइल यूनिट के माध्यम से ‘ऑपरेशन कल्कि’ अभियान शुरू किया गया, जिसके जरिए राज्य के सभी 13 जिलों तक पहुंच बनाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीण समुदायों और स्थानीय संस्थाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं और उपयोगिता से परिचित कराया गया।
राज्यपाल ने कहा कि एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और प्रशासनिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह तकनीक नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। उन्होंने युवाओं से नई तकनीकों को अपनाने और नवाचार आधारित सोच विकसित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने भी एआई आधारित नवाचारों की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ‘आरोही एआई इनक्यूबेटर’ राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने के साथ-साथ तकनीकी उद्यमिता को नई गति प्रदान करेगा। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और नवाचार से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

