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October 22, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर से दिल्ली को जाम और प्रदूषण से मिलेगी राहत

दिल्ली में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 तक तैयार किए गए इस एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने से इस मार्ग पर वाहन चालकों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही वाहनों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आने का अनुमान है।

बारापुला फेज-3 परियोजना का उद्देश्य सराय काले खां और मयूर विहार फेज-1 के बीच आवागमन को आसान बनाना है। इस मार्ग पर लंबे समय से यातायात का दबाव बना रहता है। पीक आवर्स में वाहनों की अधिक संख्या के कारण कई हिस्सों में जाम की स्थिति बनती है। ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से यातायात को वैकल्पिक और अपेक्षाकृत तेज मार्ग उपलब्ध कराया जा सकेगा।

परियोजना से जुड़े अनुमान के मुताबिक, कॉरिडोर के कारण रोजाना करीब दो टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हो सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव के लिहाज से यह कमी करीब 30 हजार पेड़ों द्वारा कार्बन सोखे जाने के बराबर मानी जा रही है। यातायात के सुचारु होने से वाहनों को जाम में लंबे समय तक खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। इससे ईंधन की खपत कम होने के साथ वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों में भी कमी आने की संभावना है।

एलिवेटेड कॉरिडोर के तैयार होने से सराय काले खां, मयूर विहार और आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। खासतौर पर रोजाना इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों के लिए यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, मौजूदा सड़क नेटवर्क पर वाहनों का दबाव घटने से आसपास के मार्गों पर भी यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सड़क और परिवहन से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यातायात की गति बेहतर होने और अनावश्यक जाम कम होने से वाहनों के ईंधन खर्च और उत्सर्जन दोनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव यातायात संचालन, वाहनों की संख्या और कॉरिडोर के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।

बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर इस लिहाज से दिल्ली के परिवहन ढांचे में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। इसका उद्देश्य केवल लोगों को जाम से राहत देना ही नहीं, बल्कि यातायात को अधिक व्यवस्थित करते हुए पर्यावरण पर वाहनों के दबाव को कम करना भी है।

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