उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं की होगी जियोस्पेशियल मैपिंग, 10 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट में पीएम गतिशक्ति पोर्टल अनिवार्य - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
July 2, 2026
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उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं की होगी जियोस्पेशियल मैपिंग, 10 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट में पीएम गतिशक्ति पोर्टल अनिवार्य





देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में नियोजन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में ‘पीएम गतिशक्ति उपयोग मामलों का संग्रह 2.0’ का विमोचन किया। इस दौरान विभागीय डेटा संग्रहण के लिए तैयार मोबाइल एप्लीकेशन का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जियोस्पेशियल तकनीक भविष्य की विकास योजनाओं का महत्वपूर्ण आधार बनेगी और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इसका उपयोग परियोजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि जियोस्पेशियल तकनीक के माध्यम से पृथ्वी पर किसी भी स्थान से जुड़ी जानकारी का संग्रह, विश्लेषण और उपयोग आसानी से किया जा सकता है। सड़क, बिजली लाइन, पेयजल परियोजनाएं, रेलवे, भवन निर्माण, बांध और अन्य बड़े विकास कार्यों में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे किसी भी परियोजना की सटीक लोकेशन, विभागों के बीच समन्वय और कार्यों की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ विभिन्न विभागों के डेटा इंटीग्रेशन के रूप में मिलेगा। यदि सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित प्रमाणिक और अद्यतन जानकारी पोर्टल पर अपलोड करेंगे तो योजनाओं की बेहतर योजना, निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे विभागों के बीच तालमेल मजबूत होगा और एक ही तरह की योजनाओं की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।

आनंद बर्द्धन ने नियोजन विभाग को व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठकों में पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाओं का अधिक प्रभावी मूल्यांकन किया जा सकेगा। साथ ही 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी परियोजनाओं में साइट चयन से पहले पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से जियोस्पेशियल मैपिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए। नई स्वीकृत सभी योजनाओं को भी इस पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को मास्टर रिसोर्स पर्सन नामित करने के निर्देश दिए, ताकि तकनीक का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने BISAG-N द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन को राज्य के ‘उन्नति’ (स्टेट प्रगति) पोर्टल से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण लेने, कार्यशालाओं में भागीदारी बढ़ाने और आवश्यक तकनीकी सहायता के लिए BISAG-N से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव एल. फैन्नई, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. एस.एन. पांडेय, श्रीधर बाबू अद्धांकी, अपर सचिव हिमांशु खुराना, नरेंद्र सिंह भंडारी, बंशीधर तिवारी तथा BISAG-N और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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