मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के पावन अवसर पर जागेश्वर धाम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने जागेश्वर धाम श्रावणी मेले का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण भी किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक मेले और आध्यात्मिक परंपराएं राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। श्रावणी मेला केवल धार्मिक आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला, लोकसंगीत और पारंपरिक जीवन मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
सीएम धामी ने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत जागेश्वर धाम का समग्र एवं सुव्यवस्थित विकास किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं, वहीं इस प्राचीन तीर्थ की दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को आस्था के साथ-साथ पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जागेश्वर धाम में स्थापित किए जा रहे संस्कृत विद्यालय के माध्यम से देववाणी संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। इससे युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ सकेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक मोहन सिंह महरा, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

