उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को आज निर्देश दिया कि वह फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट) एवं अन्य बैंक खातों के जरिये की जाने वाली साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए 4 हफ्ते के अंदर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करे।
एसओपी में संदिग्ध खातों पर अस्थायी रूप से निकासी रोकने, शिकायत निवारण की व्यवस्था, धोखाधड़ी में गंवाए गए पैसे को वापस पाने का तंत्र और इन सुविधाओं के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उपाय शामिल होंगे।
म्यूल अकाउंट का मतलब ऐसे बैंक खातों से है जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के धन को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति वी मोहन के पीठ ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने की व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी किए।
पीठ ने सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों के निवारण और गंवाए गए धन को लौटाने का तंत्र लागू करें ताकि पीड़ितों को राहत मिल सके। अदालत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामले में स्वतः संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को पुलिस/जांच एजेंसी का सदस्य बताकर किसी व्यक्ति को ऑनलाइन डराकर या नजरबंद जैसा माहौल बनाकर उससे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
अदालत ने पीड़ित मुआवजे और साझा दायित्व के लिए रूपरेखा की जांच करने के लिए अंतर-विभागीय समिति बनाने का भी निर्देश दिया।
अंतर-विभागीय समिति को निर्देश दिया गया है कि वह सरकारों और विभागों को परामर्श जारी करे। इसमें डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाने, शिकायत और पैसे की वापसी के तरीकों का इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी से गंवाए गए पैसे को वापस पाने के लिए केंद्र की एसओपी को लागू करने के बारे में कहा जाएगा।
यह धोखाधड़ी रोकने के तरीकों को बेहतर बनाने, चोरी हुए पैसे को वापस पाने में मदद करने और जांच में सहयोग देने के लिए बैंकों के साथ मिलकर काम करेगा।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्टेटस रिपोर्ट का जिक्र करते हुए तीन जजों के पीठ ने बताया कि 57 बैंकों और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की मदद से 36,290 मामलों में पीड़ितों को 18.05 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए।
इसने संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की जांच में सीबीआई की प्रगति पर भी ध्यान दिया। एजेंसी ने डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़े से जुड़े मामले दर्ज किए हैं, 67 बैंक अकाउंट के जरिये हुए लेनदेन से पीड़ितों का पता लगाया है और 16 राज्यों में 93 जगहों पर तलाशी ली है।
एक सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर के अनुसार बैंक फर्जी खातों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए कई तरीके अपना रहे हैं, जिनमें साइबर अपराध की शिकायतों से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच, लेनदेन के प्रारूप की निगरानी और एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने वाले उपकरणों का उपयोग शामिल है।

