चारधाम यात्रा से पहले बड़ी सौगात: 14 अप्रैल को खुल जाएगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, ढाई घंटे में सफर - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
May 18, 2026
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उत्तराखंड

चारधाम यात्रा से पहले बड़ी सौगात: 14 अप्रैल को खुल जाएगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, ढाई घंटे में सफर


देवभूमि उत्तराखंड के लिए लंबे समय से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब हकीकत बनने जा रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे 14 अप्रैल को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने से ठीक पहले इस हाईस्पीड कॉरिडोर की शुरुआत को उत्तराखंड के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। इससे न केवल दिल्ली और देहरादून के बीच दूरी घटेगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और तीर्थयात्रा को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्घाटन से पहले एक्सप्रेस-वे का वीडियो साझा करते हुए तैयारियों की जानकारी दी थी। लंबे समय से देवभूमि में इस परियोजना को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। राज्य सरकार इसे कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है। खासतौर पर चारधाम यात्रा से पहले इसके शुरू होने से यात्रियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर बेहद आसान हो जाएगा। नई सड़क के जरिए दूरी घटकर लगभग 213 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय करीब ढाई घंटे में सिमट जाएगा। अभी दिल्ली से देहरादून पहुंचने में सामान्य तौर पर 5 से 6 घंटे का समय लगता है, जो ट्रैफिक के कारण कई बार और बढ़ जाता है। ऐसे में यह एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड के लिए लाइफलाइन साबित हो सकता है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का कुछ हिस्सा पहले ही आम जनता के लिए खोला जा चुका है। अक्षरधाम से बागपत तक का लगभग 18 किलोमीटर लंबा स्ट्रेच पहले ही चालू कर दिया गया था। इस हिस्से के खुलने के बाद यात्रियों को आंशिक राहत मिली थी, लेकिन अब पूरे एक्सप्रेस-वे के खुलने के साथ हाईस्पीड कनेक्टिविटी पूरी तरह से स्थापित हो जाएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे का अंतिम लगभग 20 किलोमीटर हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरता है। वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिसकी लंबाई करीब 12 किलोमीटर है। इसके साथ ही 340 मीटर लंबी सुरंग भी बनाई गई है, जिससे जानवरों के प्राकृतिक आवागमन पर असर कम से कम पड़े। देहरादून में डाट काली मंदिर के पास बनाई गई यह सुरंग परियोजना का अहम हिस्सा मानी जा रही है। इसके अलावा गणेशपुर-देहरादून सेक्शन में कई एनिमल पैसेज बनाए गए हैं, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से सड़क पार कर सकें और वाहनों से टक्कर की घटनाओं को रोका जा सके। यह एक्सप्रेस-वे पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का संतुलित उदाहरण माना जा रहा है।चारधाम यात्रा से पहले इस एक्सप्रेस-वे का शुरू होना तीर्थयात्रियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। हर साल यात्रा के दौरान दिल्ली-देहरादून और हरिद्वार मार्ग पर भारी दबाव रहता है। नए एक्सप्रेस-वे के खुलने से यातायात का दबाव कम होगा और यात्रा अधिक सुगम होगी। साथ ही राज्य में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार के लिए भी यह परियोजना अहम उपलब्धि के तौर पर देखी जा रही है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से निवेश, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड पहुंचना आसान होने से वीकेंड पर्यटन को भी नई गति मिल सकती है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह एक्सप्रेस-वे अब उत्तराखंड की विकास यात्रा में नई रफ्तार जोड़ने जा रहा है।



चारधाम यात्रा से पहले हाईस्पीड कनेक्टिविटी की सौगात-




दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के साथ ही उत्तराखंड की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 14 अप्रैल को उद्घाटन के बाद यह एक्सप्रेस-वे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। चारधाम यात्रा से पहले इसके शुरू होने को रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। अभी तक यह यात्रा 5 से 6 घंटे में पूरी होती है। कई बार जाम और ट्रैफिक दबाव के कारण यात्रियों को और अधिक समय लग जाता है। नई हाईस्पीड सड़क इस समस्या का समाधान करने में मदद करेगी। यह एक्सप्रेस-वे आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण भी है। राजाजी नेशनल पार्क से गुजरने वाले हिस्से में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। यह एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बताया जा रहा है। इसके अलावा 340 मीटर लंबी सुरंग भी बनाई गई है। डाट काली मंदिर के पास बनी यह सुरंग विशेष रूप से वन्यजीवों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। इसके अलावा गणेशपुर-देहरादून सेक्शन में कई एनिमल पैसेज बनाए गए हैं। इससे जानवर सुरक्षित रूप से सड़क पार कर सकेंगे और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। एक्सप्रेस-वे का कुछ हिस्सा पहले ही खोला जा चुका है। अक्षरधाम से बागपत तक 18 किलोमीटर का स्ट्रेच पहले से चालू है। इस हिस्से के खुलने के बाद यात्रियों को आंशिक राहत मिली थी। अब पूरे एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा पूरी तरह से हाईस्पीड हो जाएगी। राज्य सरकार इस परियोजना को बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और चारधाम यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। साथ ही उत्तराखंड में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

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