उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। राज्य को जल्द ही ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद है। इसके लिए सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने जा रही है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की ‘उल्लास’ (Understanding Lifelong Learning for All in Society) योजना के तहत निर्धारित सभी मानकों को राज्य ने लगभग पूरा कर लिया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया गया। इसके तहत निरक्षर वयस्कों को बुनियादी शिक्षा, जीवनोपयोगी कौशल, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सतत शिक्षा से जोड़ा गया। इस अभियान में सामाजिक संगठनों, कॉरपोरेट संस्थाओं और आम नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कई लोगों ने गांव गोद लेकर वहां के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में योगदान दिया।
विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य वंचित वर्गों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम थी। इसी प्रयास का परिणाम है कि उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है।
केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, जब किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य घोषित किया जाता है। उत्तराखंड अब इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने से बस एक कदम दूर है।

