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July 20, 2026
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रजिस्ट्री से नहीं होता पूरा काम! घर-ज़मीन खरीदने के बाद म्यूटेशन भी है जरूरी, वरना पड़ सकते हैं कानूनी और आर्थिक पचड़े


भारत में अपना घर या जमीन खरीदना हर व्यक्ति का बड़ा सपना होता है। अधिकांश लोग मानते हैं कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री कराने के बाद संपत्ति पूरी तरह उनकी हो जाती है, लेकिन कानूनी तौर पर यह प्रक्रिया यहीं खत्म नहीं होती। प्रॉपर्टी खरीदने के बाद उसका म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, रजिस्ट्री मालिकाना हक का कानूनी दस्तावेज होती है, जबकि म्यूटेशन के जरिए नगर निगम या राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। यदि म्यूटेशन नहीं कराया गया, तो सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम बना रह सकता है, जिससे प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली-पानी कनेक्शन, बैंक लोन, बिल्डिंग परमिशन और भविष्य में संपत्ति बेचने जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कत आ सकती है।

दिल्ली बार काउंसिल के अधिवक्ता समर्थ लूथरा बताते हैं कि रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन दो अलग-अलग सरकारी प्रक्रियाएं हैं। रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में संपत्ति का मालिकाना हक हस्तांतरित होता है, जबकि म्यूटेशन केवल प्रशासनिक और राजस्व रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया है। रियल एस्टेट सलाहकार संस्था SILA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अंकित माहेश्वरी के मुताबिक, म्यूटेशन से मालिकाना हक न बनता है और न खत्म होता है, लेकिन इसे न कराने पर कई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम बना रहे, तो बेईमान विक्रेता संपत्ति को दोबारा बेचने या उसके आधार पर ऋण लेने की कोशिश कर सकता है। हालांकि अदालत में रजिस्टर्ड सेल डीड सबसे मजबूत सबूत होती है, लेकिन ऐसे मामलों में खरीदार को लंबे कानूनी विवाद का सामना करना पड़ सकता है। कई बैंक भी रजिस्ट्री और म्यूटेशन रिकॉर्ड में अंतर होने पर होम लोन देने से इनकार कर सकते हैं। यदि भविष्य में जमीन किसी सरकारी परियोजना के लिए अधिग्रहित होती है, तो मुआवजा मिलने में भी देरी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट भी अपने कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि म्यूटेशन से मालिकाना हक तय नहीं होता। संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व केवल वैध टाइटल दस्तावेजों, जैसे रजिस्टर्ड सेल डीड या वसीयत, से ही साबित होता है। म्यूटेशन केवल राजस्व रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रजिस्ट्री के 30 से 90 दिनों के भीतर नगर निगम, तहसील या राज्य के ऑनलाइन राजस्व पोर्टल पर म्यूटेशन के लिए आवेदन कर देना चाहिए। इसके लिए रजिस्टर्ड सेल डीड, पहचान पत्र, प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। यदि कोई विवाद न हो, तो आमतौर पर 30 से 60 दिनों में रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है। साथ ही, प्रॉपर्टी खरीदने से पहले 13 से 30 वर्ष पुराने टाइटल रिकॉर्ड और एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की जांच कर लेना भी सुरक्षित निवेश के लिए जरूरी माना जाता है।

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