भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में आज गुरुवार सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा ने पूर्णता प्राप्त कर ली और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला।
डोली यात्रा का जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
बुधवार सुबह योग-ध्यान बदरी मंदिर, पांडुकेश्वर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद तेल कलश यात्रा और देव डोलियां बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख पड़ावों पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयघोष के साथ डोली का भव्य स्वागत किया। कुबेरजी की मूर्ति को बामणी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर में और उद्धवजी को रावल निवास में रात्रि विश्राम कराया गया।
फूलों से सजा मंदिर, विधि-विधान से हुई पूजा
कपाटोद्घाटन से पहले मंदिर को 25 क्विंटल गेंदा और रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। प्रातःकाल मुख्य पुजारी रावल जी, धर्माधिकारी और वेदपाठियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई। परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी को गर्भगृह से निकालकर लक्ष्मी मंदिर में विराजमान किया गया, जबकि भगवान कुबेर और उद्धव जी को गर्भगृह में स्थापित किया गया।
इसके बाद भगवान बद्री विशाल की चतुर्भुज मूर्ति का विधिवत अभिषेक, श्रृंगार और आरती की गई। कपाट खुलते ही पूरा धाम “जय बद्री विशाल” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया।
सीएम धामी रहे मौजूद, पीएम मोदी के नाम से पहली पूजा
कपाट खुलने के ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बदरीनाथ धाम में उपस्थित रहे। उन्होंने पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।
यात्रियों के लिए पुख्ता इंतजाम, सुरक्षा के कड़े प्रबंध
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, यात्रा मार्ग पर पुलिस और प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारू दर्शन के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई हैं, जिससे यात्रा सुगम और सुरक्षित बन सके।
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