भारत में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को पेश कर दिया है। 4 जून को लॉन्च की गई यह कार 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी E85 पर चलने में सक्षम है। इसे भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह वाहन न केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करेगा बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी घटाने में मददगार साबित होगा।
नई वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उपस्थिति में पेश किया गया। दोनों मंत्री लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन, जैव ईंधन और घरेलू ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में इस वाहन का लॉन्च भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित परिवहन नीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने इस अवसर पर कहा कि भारत के सामने वर्तमान समय में दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती विदेशों से आयात किए जाने वाले कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और दूसरी चुनौती कार्बन उत्सर्जन को घटाकर पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ताकेउची के अनुसार एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि इससे देश में उत्पादित जैव ईंधनों की मांग भी बढ़ेगी। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है और भविष्य में देश के ऑटोमोबाइल उद्योग को नई दिशा देने का काम करेगी।


मारुति सुजुकी ने अपनी लोकप्रिय और सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक कार वैगनआर को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के साथ पेश किया है। कंपनी का मानना है कि ग्राहकों के बीच पहले से लोकप्रिय मॉडल में नई तकनीक को शामिल कर उसे अधिक व्यावहारिक और स्वीकार्य बनाया जा सकता है। हालांकि कंपनी ने वाहन के बाहरी डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, लेकिन इसके इंजन और फ्यूल सिस्टम में कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए हैं।
इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका फ्लेक्स-फ्यूल इंटरनल कंबशन इंजन है। यह इंजन सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ E85 ईंधन पर भी आसानी से चल सकता है। E85 एक ऐसा मिश्रित ईंधन है जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है और इसे पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।
एथेनॉल के उपयोग को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए कंपनी ने कार के फ्यूल सिस्टम, इंजन कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में विशेष बदलाव किए हैं। एथेनॉल सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक संक्षारक माना जाता है, इसलिए वाहन के कई हिस्सों को विशेष सामग्री और तकनीक के साथ तैयार किया गया है ताकि लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।
कंपनी का दावा है कि इन तकनीकी सुधारों के कारण वाहन की कार्यक्षमता, इंजन की आयु और प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत यह तकनीक बेहतर ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद करेगी।
नई वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को प्रदूषण कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत भी अब इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में एथेनॉल उत्पादन और वितरण नेटवर्क मजबूत होता है तो फ्लेक्स-फ्यूल वाहन आम ग्राहकों के लिए भी किफायती विकल्प बन सकते हैं। एथेनॉल की कीमत पेट्रोल की तुलना में कम होने की संभावना रहती है, जिससे वाहन चलाने की लागत में भी कमी आ सकती है।
हालांकि फिलहाल यह कार आम ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। कंपनी ने इसे शुरुआती चरण में केवल फ्लीट ऑपरेटर्स और ओला-उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स के लिए पेश किया है। इसके पीछे उद्देश्य बड़े पैमाने पर इस तकनीक की व्यवहारिकता और प्रदर्शन का आकलन करना है। व्यावसायिक उपयोग में वाहन के प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में इसे आम ग्राहकों के लिए भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
फिलहाल मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल की कीमत का खुलासा नहीं किया है। हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें किए गए अतिरिक्त तकनीकी और मैकेनिकल बदलावों के कारण इसकी कीमत मौजूदा पेट्रोल और सीएनजी वेरिएंट से कुछ अधिक हो सकती है।
भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की दर लगातार बढ़ाई जा रही है ताकि तेल आयात पर खर्च कम किया जा सके और किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का आगमन इस नीति को और मजबूती प्रदान करेगा।
ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ यह तकनीक भी स्वच्छ परिवहन के विकल्प के रूप में उभर सकती है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, वहां फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल का लॉन्च केवल एक नई कार की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

