प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन देशवासियों से ईंधन और संसाधनों का सीमित उपयोग करने की अपील की। गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देशहित में छोटी-छोटी बचत की आदत अपनाए। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और अनावश्यक खर्चों से बचने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां तक संभव हो लोग निजी वाहनों का कम उपयोग करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों तथा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लें। उनका कहना था कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। मोदी ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी मुद्रा बचाने में आम नागरिक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने लोगों को कोरोना महामारी के समय की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह पूरे देश ने मिलकर उस संकट का सामना किया था, उसी तरह वर्तमान चुनौतियों से भी देश एकजुट होकर बाहर निकलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हर कठिन समय में सामूहिक शक्ति का परिचय दिया है और इस बार भी देशवासियों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
अपने संबोधन में मोदी ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से भी खास अपील की। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय भारत के सांस्कृतिक दूत हैं और उन्हें कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घूमने के लिए प्रेरित करना चाहिए। प्रधानमंत्री के मुताबिक इससे भारत के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, विरासत और पर्यटन स्थलों को दुनिया तक पहुंचाने में प्रवासी भारतीय अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने सोने के आयात का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गोल्ड खरीदने में देश की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक सोने की खरीदारी टालने की कोशिश करें। मोदी ने कहा कि इस समय देश को जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर खर्च करने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने खाद्य तेल की खपत कम करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि खाने के तेल के आयात पर भी भारत का भारी विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होता है। यदि लोग तेल का सीमित उपयोग करें तो इससे स्वास्थ्य के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कम तेल का उपयोग लोगों की सेहत और देश दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
मोदी ने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में हर नागरिक का छोटा योगदान भी देश के लिए बड़ी ताकत बन सकता है।

