Uttarakhand DIPR
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October 17, 2026
Daily Lok Manch
उत्तर प्रदेश

योगी कैबिनेट का बड़ा विस्तार : 6 नए मंत्रियों की एंट्री, दो का हुआ प्रमोशन, भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री, योगी सरकार ने साधे बड़े राजनीतिक समीकरण



उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में रविवार को दूसरी बार कैबिनेट विस्तार किया गया। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल 8 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें 2 कैबिनेट मंत्री, 2 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 4 राज्य मंत्री शामिल हैं। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।



समारोह में सबसे पहले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। उनके बाद समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए विधायक मनोज पांडेय ने मंत्री पद की शपथ ली। दोनों नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके बाद अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।

वहीं कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्य मंत्री पद की शपथ ली। खास बात यह रही कि कृष्णा पासवान पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रह चुकी हैं। भाजपा ने इस विस्तार के जरिए दलित, पिछड़ा और ब्राह्मण वर्ग को साधने की कोशिश की है। नए मंत्रियों में 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरे शामिल किए गए हैं।

शपथ ग्रहण के बाद कई नए मंत्रियों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत यूपी मंत्रिमंडल में कुल 60 मंत्री हो गए हैं। इससे पहले योगी सरकार का पहला विस्तार 5 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था।

हालांकि कैबिनेट विस्तार के बाद भाजपा के भीतर नाराजगी भी सामने आई है। सीतापुर की महमूदाबाद सीट से भाजपा विधायक आशा मौर्य ने मंत्री पद न मिलने पर पार्टी नेतृत्व पर मौर्य समाज की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पुराने कार्यकर्ताओं के बजाय दलबदल कर आए नेताओं को ज्यादा महत्व दिया है।

उधर, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मनोज पांडेय के मंत्री बनने पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी से निष्कासन के बाद मनोज पांडेय अब निर्दलीय विधायक की तरह माने जाते हैं, इसलिए उनके मंत्री पद की शपथ को कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे सपा में रहते हुए मंत्री बनते, तब यह दलबदल कानून के तहत विवाद का विषय बन सकता था।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया संतुलित राजनीतिक संदेश भी है।

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