मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर, भाजपा ने जीतीं तीनों राज्यसभा सीटें, जानिए किन चेहरों को मिला संसद का टिकट, कांग्रेस को बड़ा झटका, वीडियो - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
June 11, 2026
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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर, भाजपा ने जीतीं तीनों राज्यसभा सीटें, जानिए किन चेहरों को मिला संसद का टिकट, कांग्रेस को बड़ा झटका, वीडियो



मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव ने बड़ा मोड़ ले लिया है। जिस तीसरी सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही थी, वह अंततः भाजपा के खाते में चली गई। गुरुवार को चुनाव आयोग ने भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचित घोषित करते हुए निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए। इसके साथ ही भाजपा ने प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर कब्जा जमाकर विपक्ष को बड़ा राजनीतिक झटका दे दिया।

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर थी। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। विधानसभा में पार्टी के पास इतना संख्या बल था कि वह एक सीट जीतने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुए घटनाक्रम ने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया और भाजपा को अप्रत्याशित बढ़त मिल गई।



राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को हुई थी। इसी दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी के अन्य नेताओं ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म-26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी है।



नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताते हुए चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों का दरवाजा खटखटाया। पार्टी का कहना था कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, इसलिए उस मामले का उल्लेख हलफनामे में करना अनिवार्य नहीं था।

मामला तेजी से राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक विवाद बन गया। कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को चुनौती दी। पार्टी ने आयोग से हस्तक्षेप कर नामांकन बहाल करने की मांग की, लेकिन आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक फैसला सामने नहीं आया।

उधर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर दी। सुनवाई के दौरान पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नाम वापस लेने की अंतिम समय-सीमा निकट है और यदि मामले का जल्द निपटारा नहीं हुआ तो कांग्रेस को अपूरणीय नुकसान होगा।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया था कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा की राह आसान हो गई है। आखिरकार गुरुवार को चुनाव आयोग ने तीनों भाजपा उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी कर दिए।

कौन हैं वे तीन चेहरे जिन्हें मिला राज्यसभा का टिकट

भाजपा की ओर से निर्वाचित हुए तीनों उम्मीदवार अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। रजनीश अग्रवाल लंबे समय से संगठन और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं।

तरुण चुग भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। संगठनात्मक क्षमता और पार्टी के विभिन्न राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्यसभा पहुंचने के बाद पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव और मजबूत प्रतिनिधित्व मिलेगा।

वहीं महेश केवट का राज्यसभा पहुंचना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछड़े वर्ग और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने उन्हें मैदान में उतारा था। उनके निर्वाचित होने को पार्टी की सामाजिक संतुलन रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह परिणाम बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी जिस सीट को अपनी संभावित जीत मानकर चल रही थी, वह नामांकन विवाद के कारण हाथ से निकल गई। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नामांकन निरस्त करने का फैसला कानूनी रूप से कमजोर और राजनीतिक रूप से प्रेरित था।

कांग्रेस की ओर से यह भी दलील दी गई कि तेलंगाना में जिस मामले का हवाला दिया गया है, वह केवल एक निजी शिकायत पर जारी कारण बताओ नोटिस था। पार्टी का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में औपचारिक रूप से संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की लगातार बैठकें चल रही हैं और आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया जा रहा है। पार्टी अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर नजर बनाए हुए है। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद राजनीतिक रूप से भाजपा की जीत तय हो चुकी है।

यह चुनाव केवल तीन राज्यसभा सीटों का नहीं था, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का भी मंच बन गया। भाजपा ने तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर विधानसभा में अपने मजबूत बहुमत और संगठनात्मक ताकत का संदेश दिया है, जबकि कांग्रेस को एक ऐसी सीट गंवानी पड़ी जिस पर वह दावा मजबूत मान रही थी।

फिलहाल मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ी सफलता और कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और कांग्रेस की अगली रणनीति पर टिकी हुई है, लेकिन फिलहाल राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा प्रदेश की राजनीति में उसकी मजबूत स्थिति को और स्पष्ट कर गया है।

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