September 9, 2026
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हिमाचल

हिमाचल के सीएम सुक्खू ने डॉ. जितेंद्र सिंह से की मुलाकात, मौसम चेतावनी, लैवेंडर खेती और एस्ट्रो-टूरिज्म पर चर्चा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मौसम निगरानी और पूर्व-चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत लैवेंडर की खेती का विस्तार, ग्राम पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान, स्पीति में अत्यधिक ऊंचाई वाली आकाश वेधशाला की संभावनाओं और राज्य कैडर से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श हुआ। सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में पांच डॉप्लर मौसम रडार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का आभार जताया।

पांच डॉप्लर रडार के लिए केंद्र का आभार

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में मौसम निगरानी और पूर्व-चेतावनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए केंद्र के सहयोग की सराहना की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य के दुर्गम पर्वतीय भू-भाग और प्रतिकूल मौसम से जुड़ी घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए प्रभावी पूर्व-चेतावनी प्रणाली सुनिश्चित करना जरूरी है। बैठक में राज्य के मौसम निगरानी नेटवर्क के प्रस्तावित विस्तार पर भी चर्चा हुई।

लाहौल-स्पीति और किन्नौर में नए रडार का प्रस्ताव

हिमाचल प्रदेश में फिलहाल कुफरी, जोत और मुरारी देवी में तीन डॉप्लर मौसम रडार हैं, जबकि दो अन्य रडार निर्माणाधीन हैं। इनके पूरा होने के बाद राज्य में कुल पांच डॉप्लर मौसम रडार हो जाएंगे। इसके अलावा प्रस्तावित विस्तार के तहत दो और रडार लगाने की योजना है। इनमें एक लाहौल-स्पीति और दूसरा किन्नौर में प्रस्तावित है। दोनों स्थानों पर उपयुक्त स्थल की जांच की जा रही है, हालांकि स्थल चयन में बीम अवरोध से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

मौसम निगरानी नेटवर्क भी होगा मजबूत

राज्य में भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौजूदा अवलोकन नेटवर्क में 28 स्वचालित मौसम स्टेशन, 64 स्वचालित वर्षामापी और 84 दैनिक वर्षा निगरानी स्टेशन शामिल हैं। प्रस्तावित विस्तार में 20 स्वचालित मौसम स्टेशन, 24 स्वचालित वर्षामापी, 21 स्वचालित हिममापी और एक रेडियोसोंडे/रेडियो विंड प्रणाली शामिल करने की योजना है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचेगा मौसम पूर्वानुमान

बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग की ‘मौसमग्राम’ सेवा पर भी चर्चा हुई। इस पहल के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों समेत आम लोगों को स्थानीय मौसम की जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे दैनिक गतिविधियों और कृषि संबंधी निर्णयों की बेहतर योजना बना सकें।

मंडी में लैवेंडर की खेती का सफल मॉडल

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत सफल लैवेंडर खेती मॉडल के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की। अरोमा मिशन के तीसरे चरण के तहत सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू ने मंडी जिले के बलद्वार तहसील के ऊपरी भामला में लैवेंडर की खेती का विस्तार किया है। यहां 20,000 लैवेंडर पौधे लगाए गए हैं और करीब 150 किसान इस पहल से जुड़े हैं।

किसानों को मिलेंगी आसवन इकाइयां

लैवेंडर की खेती के शुरुआती परीक्षणों को सफल बताया गया है। इस मौसम में इसके तहत और अधिक क्षेत्र को शामिल करने का प्रस्ताव है। अरोमा मिशन के चौथे चरण में किसानों को आसवन इकाइयां उपलब्ध कराने की भी योजना है। इसका उद्देश्य खेती को प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और उद्योग से जोड़कर किसानों की आय के नए अवसर तैयार करना है।

दूसरे राज्यों में भी विस्तार की योजना

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर से आगे नगालैंड, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी लैवेंडर पहल के विस्तार की जानकारी दी। इस मॉडल के जरिए खेती को उद्योग और मूल्यवर्धन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान केवल कच्ची उपज बेचने के बजाय उससे जुड़े प्रसंस्करण और अन्य आर्थिक गतिविधियों से भी लाभ उठा सकें।

स्पीति में उच्च ऊंचाई वाली वेधशाला की संभावना

बैठक में स्पीति में अत्यधिक ऊंचाई वाली खगोल वेधशाला स्थापित करने की संभावना पर भी विचार किया गया। प्रस्ताव पर भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के परामर्श से काम किया जा रहा है। स्पीति की ऊंचाई और खगोलीय अवलोकन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जा सकता है।

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