September 30, 2026
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राष्ट्रीय

यूपी में हुक्का बार पर हाईकोर्ट की सख्ती, स्मोकिंग एरिया में भी नहीं मिलेगी हुक्का सर्विस



इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में हुक्का सर्विस को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि होटल, रेस्तरां, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने हुक्का बार के संचालन से जुड़ी 80 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि स्मोकिंग एरिया सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध का सीमित अपवाद है, लेकिन इसे रेस्टोरेंट की व्यावसायिक सेवा का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।

अदालत ने कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सेवा की अनुमति नहीं है। वर्ष 2017 में नियमों में किए गए संशोधन के बाद ‘कोई अन्य सेवा’ के स्थान पर ‘कोई सेवा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। कोर्ट के मुताबिक इसका दायरा व्यापक है। हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, अंगारा लगाना, ग्राहक तक हुक्का पहुंचाना, अंगारा बदलना या अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी करना सेवा की श्रेणी में आता है। इसलिए स्मोकिंग एरिया होने के बावजूद रेस्टोरेंट इन गतिविधियों को अंजाम नहीं दे सकते।

सेल्फ सर्विस और किराये की दलील भी खारिज

हुक्का बार और रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि यदि ग्राहक को तैयार हुक्का उपलब्ध करा दिया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे तो इसे ‘सेल्फ सर्विस’ माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि हुक्का उपकरण को ग्राहक को किराये पर दिया जा सकता है और इसे सेवा नहीं माना जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने दोनों दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि हुक्का तैयार करने और उसे इस्तेमाल के योग्य बनाने की प्रक्रिया में कई गतिविधियां शामिल होती हैं। केवल ग्राहक के खुद हुक्का पीने से रेस्टोरेंट की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सेवा का स्वरूप नहीं बदल जाता। इसी तरह तैयार हुक्का केवल उपकरण किराये पर देने जैसा मामला नहीं है, क्योंकि ग्राहक उसका इस्तेमाल उसी निर्धारित क्षेत्र में करता है और हुक्का तैयार करने, उपलब्ध कराने तथा उसके रखरखाव से जुड़ी गतिविधियां प्रतिष्ठान की ओर से होती हैं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम यानी कोटपा के तहत पुलिस को तलाशी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई की शक्तियों को भी बरकरार रखा।

फैसले में हाईकोर्ट ने गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार महत्वपूर्ण है और इसे किसी प्रतिष्ठान के व्यावसायिक हितों से कमतर नहीं माना जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र का मतलब यह नहीं है कि वहां रेस्टोरेंट ग्राहकों को हुक्का या उससे जुड़ी कोई व्यावसायिक सेवा उपलब्ध करा सकते हैं। फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश भी दिया गया।

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