कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री Siddaramaiah के भविष्य को लेकर पार्टी के अंदर गहन मंथन जारी है और माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब सत्ता की कमान उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar को सौंपने की तैयारी में जुट गया है।
दिल्ली में हाल ही में हुई कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, नेता विपक्ष Rahul Gandhi, महासचिव K. C. Venugopal और कर्नाटक प्रभारी Randeep Surjewala के साथ मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार भी मौजूद रहे। करीब छह घंटे चली इस मैराथन बैठक में संगठन और सरकार दोनों के भविष्य पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व राज्य में आगामी चुनावी रणनीति और अंदरूनी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सत्ता परिवर्तन के फार्मूले पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि हाईकमान सिद्दरमैया को सम्मानजनक विदाई देकर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता तलाश रहा है। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कांग्रेस के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच समझौता हुआ था। उस समय पार्टी ने सिद्दरमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर संतुलन साधा था। अब माना जा रहा है कि उसी फार्मूले के दूसरे चरण पर अमल की तैयारी हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने से कांग्रेस वोक्कालिगा वोट बैंक को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। वहीं सिद्दरमैया की प्रशासनिक पकड़ और जनाधार को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय राजनीति या संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की भी चर्चा है।
इधर कर्नाटक कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं ने खुलकर बयान देना शुरू कर दिया है। कुछ नेता नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से इनकार कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी का आंतरिक मामला बता रहे हैं। विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है और इसका असर शासन पर पड़ रहा है।
कांग्रेस हाईकमान फिलहाल किसी भी तरह के विवाद या असंतोष से बचते हुए सत्ता परिवर्तन को शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम देना चाहता है। आने वाले दिनों में दिल्ली और बेंगलुरु में होने वाली बैठकों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है और इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

