September 12, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

चमोली टनल हादसा: खत्म हुआ 117 घंटे का रेस्क्यू अभियान, 10 श्रमिकों की मौत

चमोली जिले के हाट-सियासैण और मायापुर (पीपलकोटी) में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद 117 घंटे से अधिक समय तक चला खोज एवं बचाव अभियान मंगलवार को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। रेस्क्यू टीमों ने टनल में फंसे और लापता सभी श्रमिकों को बाहर निकाल लिया है। हादसे में कुल 10 श्रमिकों की मौत हुई, जबकि 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

13 अगस्त की शाम टनल के भीतर अचानक पानी का रिसाव होने के साथ भूस्खलन हुआ था। घटना के समय टनल में एचसीसी कंपनी के कर्मचारी काम कर रहे थे। हादसे के बाद करीब 22 श्रमिकों के टनल में फंसे होने की प्रारंभिक सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, टीएचडीसी समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया।

लगातार पांच दिन चला चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान

करीब 117 घंटे से अधिक चले इस अभियान के दौरान रेस्क्यू टीमों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया। टनल के भीतर जमा पानी निकालने, मलबा हटाने और फंसी मशीनरी को बाहर निकालने के साथ संभावित स्थानों पर लगातार खोजबीन की गई।

अभियान के पहले दिन 19 श्रमिकों को बाहर निकाला गया था। इनमें 12 घायल श्रमिक और सात मृत श्रमिक शामिल थे। इसके बाद 15 अगस्त को एक और श्रमिक का शव बरामद किया गया, जबकि रेस्क्यू अभियान के अंतिम दिन 18 अगस्त को दो और श्रमिकों के शव बाहर निकाले गए। इसके साथ ही टनल में फंसे सभी प्रभावित श्रमिकों को बाहर निकालने का अभियान पूरा हो गया।

रेस्क्यू के दौरान पानी की निकासी के लिए सक्शन पंप समेत कई आवश्यक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। मलबे और पानी के बीच लगातार काम करते हुए टीमों ने टनल के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच बनाई और संभावित स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया।

जिलाधिकारी ने संभाली अभियान की निगरानी

पूरे रेस्क्यू अभियान की जिलाधिकारी गौरव कुमार ने लगातार निगरानी की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और विभिन्न बचाव एजेंसियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली और सभी टीमों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया।

जिला प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे और लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना थी। इसी लक्ष्य के साथ रेस्क्यू टीमें दिन-रात लगातार अभियान में जुटी रहीं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद आधुनिक उपकरणों और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए खोज एवं बचाव कार्य जारी रखा गया।

घायलों को तत्काल मिली चिकित्सा सहायता

टनल से बाहर निकाले गए घायल और प्रभावित श्रमिकों को तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से उनके स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी लगातार निगरानी की गई।

अभियान में शामिल सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय और तत्परता के साथ लगातार खोज एवं बचाव अभियान चलाया। लंबे और चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद मंगलवार को टनल में फंसे और लापता सभी श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया। हालांकि हादसे में 10 श्रमिकों की जान जाने से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

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