उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पारंपरिक विधि-विधान और उत्साह के साथ शुरू होते ही आस्था के विशाल जनसैलाब में बदल गई है। यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। केवल केदारनाथ धाम में तीन दिनों के भीतर 93 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, जबकि 24 अप्रैल की शाम 7 बजे तक चारों धामों में कुल 1 लाख 82 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं। कपाट खुलने के बाद से प्रतिदिन करीब 50 हजार श्रद्धालु यात्रा कर रहे हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।
श्रद्धालुओं की इस अप्रत्याशित भीड़ को संभालना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसे लेकर कांग्रेस के साथ ही लोक कलाकारों ने भी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं की अचानक आमद ने प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा ले ली। शुरुआती दौर में भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल रहा, हालांकि बाद में प्रशासन और पुलिस ने हालात को काबू में करने की कोशिश की।
इस बीच, यमुनोत्री में पहले ही दिन दो श्रद्धालुओं की मौत ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि इसके बाद प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए गंगोत्री और यमुनोत्री में हालात सामान्य कर दिए हैं, लेकिन केदारनाथ और बदरीनाथ में बढ़ती भीड़ अब भी चुनौती बनी हुई है।
22 और 23 अप्रैल को केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद यात्रा ने और रफ्तार पकड़ ली। केदारनाथ से सामने आ रही तस्वीरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें, घंटों का इंतजार और अव्यवस्था साफ नजर आ रही है। कई श्रद्धालु कठिन यात्रा के बावजूद समय पर दर्शन नहीं कर पा रहे, जिससे निराशा भी देखने को मिल रही है।
उधर, बदरीनाथ धाम में भी लगातार बढ़ती भीड़ ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में इतनी बड़ी संख्या को संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन इस बार यह स्थिति और गंभीर रूप में सामने आई है।

