उत्तराखंड में शनिवार, 25 अप्रैल का दिन लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के लिए बेहद अहम और यादगार बन गया। महीनों की मेहनत, तनाव और इंतजार के बाद आखिरकार वह घड़ी आ गई जब बोर्ड परीक्षा के नतीजों ने छात्रों के भविष्य की दिशा तय कर दी। सुबह से ही छात्र-छात्राएं अपने-अपने परिणाम जानने के लिए उत्सुक नजर आए, वहीं अभिभावकों और शिक्षकों की निगाहें भी इस पर टिकी रहीं कि इस बार प्रदर्शन कैसा रहेगा। हर साल की तरह इस बार भी रिजल्ट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं रहा, बल्कि इसमें मेहनत, संघर्ष और सपनों की कहानी साफ झलकती नजर आई। खास बात यह रही कि एक बार फिर बेटियों ने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया और यह साबित कर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में वे किसी से पीछे नहीं हैं। राज्यभर में कई ऐसे छात्र-छात्राएं सामने आए, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतरीन अंक हासिल कर मिसाल पेश की। पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में शिक्षा के स्तर में जो निरंतर सुधार देखने को मिला है, उसका असर इस बार के परिणामों में भी साफ दिखाई दिया। बेहतर परीक्षा प्रबंधन, डिजिटल प्रक्रियाओं का विस्तार और शिक्षकों की मेहनत ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। इसी सकारात्मक माहौल के बीच उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने शनिवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया। इस बार का रिजल्ट कई मायनों में खास रहा जहां एक ओर कुल पास प्रतिशत में सुधार दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर बेटियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। हाईस्कूल परीक्षा में इस वर्ष कुल परिणाम 92.10 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। आंकड़ों के अनुसार बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 96.07 रहा, जबकि बालकों का पास प्रतिशत 88.03 दर्ज किया गया। इससे साफ है कि लड़कियों ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित की है।इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम भी उत्साहजनक रहा, जहां कुल 85.11 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सफल हुए। यहां भी बालिकाओं ने बाजी मारी उनका पास प्रतिशत 88.09 रहा, जबकि लड़कों का 81.93 प्रतिशत रहा। यह लगातार बढ़ती शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा और बेटियों की मजबूत तैयारी को दर्शाता है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने सफल छात्रों को बधाई दी है। साथ ही उन्होंने असफल विद्यार्थियों को निराश न होने और दोबारा मेहनत के साथ प्रयास करने का संदेश दिया। अगर हाईस्कूल टॉपर्स की बात करें तो रामनगर (नैनीताल) स्थित एमपी हिंदू इंटर कॉलेज के छात्र अक्षत गोपाल ने 500 में से 491 अंक (98.20%) प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। वहीं उत्तरकाशी के ईशान कोठारी और नैनीताल के जीआईसी खेरना की छात्रा भूमिका पांडे ने 490 अंक (98%) के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया। खास बात यह रही कि भूमिका पांडे ने बालिकाओं की मेरिट सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर बेटियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को और मजबूत किया। बागेश्वर के योगेश जोशी ने 489 अंक (97.80%) हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। जिला स्तर पर भी इस बार बागेश्वर ने शानदार प्रदर्शन किया। हाईस्कूल में बागेश्वर जिला 96.98 प्रतिशत परिणाम के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। कुल 1,08,983 परीक्षार्थियों में से 1,00,373 छात्र-छात्राएं सफल हुए, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत है।
इंटरमीडिएट में बागेश्वर ने दोहराई सफलता की कहानी–
इंटरमीडिएट परीक्षा में भी सफलता की कहानी लगभग वैसी ही रही। इस बार कुल परिणाम 85.11 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.88 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि बताती है कि राज्य में शिक्षा का स्तर लगातार सुधर रहा है। टॉपर्स की सूची में सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, बागेश्वर की गीतिका पंत और उधम सिंह नगर की सुशीला मेहंदीरत्ता ने 490/500 अंक (98%) हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर ऋषिकेश के आर्यन रहे, जिन्होंने 489 अंक (97.80%) प्राप्त किए, जबकि हरिद्वार की वंशिका ने 485 अंक (97%) के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इंटरमीडिएट में भी बागेश्वर जिला 94.81 प्रतिशत परिणाम के साथ राज्य में प्रथम स्थान पर रहा। परीक्षा में कुल 1,02,986 छात्र पंजीकृत थे, जिनमें से 1,00,452 ने परीक्षा दी और 85,499 छात्र-छात्राएं सफल हुए। परिणाम के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 7,814 छात्र सम्मान सहित उत्तीर्ण हुए, जबकि 41,507 छात्र प्रथम श्रेणी में पास हुए। द्वितीय श्रेणी में 34,987 और तृतीय श्रेणी में केवल 330 छात्र ही रहे, जो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाता है। इस बार परीक्षा प्रक्रिया भी काफी व्यवस्थित और समयबद्ध रही। प्रयोगात्मक परीक्षाएं 16 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित की गईं, जबकि लिखित परीक्षाएं फरवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर 20 मार्च तक चलीं। पूरे प्रदेश में 1,261 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिनमें 50 एकल और 1,211 मिश्रित केंद्र शामिल थे। सुरक्षा के लिहाज से 156 केंद्रों को संवेदनशील और 6 को अति संवेदनशील घोषित किया गया था। टिहरी गढ़वाल में सबसे अधिक 136 केंद्र बनाए गए, जबकि चंपावत में सबसे कम 44 केंद्र रहे। इस साल एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, पहली बार आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कराई गई, जिससे छात्रों को काफी सहूलियत मिली। साथ ही, स्कूलों को अलग-अलग पोर्टल और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए, ताकि छात्र अपने विद्यालय में ही आसानी से परिणाम देख सकें। छात्र अपना परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल पारदर्शिता और सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम न केवल बेहतर आंकड़ों का संकेत देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य में शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है। बेटियों का शानदार प्रदर्शन इस बदलाव की सबसे मजबूत तस्वीर पेश करता है, जो आने वाले समय में और भी सकारात्मक परिणामों की उम्मीद जगाता है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सफल विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं–
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित होते ही पूरे प्रदेश में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। हजारों छात्र-छात्राओं की मेहनत रंग लाई और उन्होंने सफलता हासिल कर अपने परिवार और राज्य का नाम रोशन किया। इस खास मौके पर राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जहां एक ओर सफल छात्र-छात्राओं को बधाइयों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर उन छात्रों का भी हौसला बढ़ाया जा रहा है, जिन्हें इस बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाया। इसी क्रम में गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सफल सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इसे न केवल विद्यार्थियों बल्कि उनके अभिभावकों, गुरुजनों और पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बताया। राज्यपाल ने माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन, प्रेरणा और निरंतर सहयोग से ही छात्र इस मुकाम तक पहुंच सके हैं। साथ ही उन्होंने उन विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहित किया, जिन्हें इस बार सफलता नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं होती, बल्कि यह सीखने और आगे बढ़ने का अवसर होती है। आत्मविश्वास और नई ऊर्जा के साथ दोबारा प्रयास करने पर सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के निरंतर परिश्रम, अनुशासन और अटूट संकल्प का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यही लगन और आत्मविश्वास उन्हें जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
मुख्यमंत्री ने उन छात्रों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश दिया, जिन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। उन्होंने कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है, बल्कि धैर्य, सकारात्मक सोच और लगातार प्रयास के साथ वे भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने सफल विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी बधाई दी और उनके सहयोग को सराहा। इस तरह उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने मिलकर विद्यार्थियों को न सिर्फ उनकी सफलता पर बधाई दी, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित भी किया। यह संदेश प्रदेश के युवाओं के लिए नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करने वाला साबित हो रहा है।

