August 19, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

ज्ञान की नई ऊंचाई पर उत्तराखंड, 98 प्रतिशत से अधिक साक्षरता के साथ बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य, राज्यपाल ने दी मंजूरी

उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद उत्तराखंड को आधिकारिक तौर पर पूर्ण साक्षर राज्य घोषित कर दिया गया है। यह उपलब्धि केवल साक्षरता के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी है, जिन्होंने पढ़ना-लिखना सीखकर आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ाया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और केंद्र सरकार के उल्लास (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ) कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद राज्य सरकार ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का प्रस्ताव भेजा था। सभी आवश्यक मानकों की पुष्टि और राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इस उपलब्धि पर आधिकारिक मुहर लग गई।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। राज्य ने उल्लास कार्यक्रम के अंतर्गत वयस्क शिक्षा, बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, जीवन कौशल और सतत शिक्षा जैसे सभी प्रमुख मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संगठनों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
राज्य सरकार ने दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों, सीमांत गांवों और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए। स्वयंसेवकों और शिक्षकों ने घर-घर जाकर निरक्षर लोगों को पढ़ाने का कार्य किया, जिससे बड़ी संख्या में वयस्क भी साक्षर बने। डिजिटल माध्यमों, सामुदायिक शिक्षण केंद्रों और जनभागीदारी ने भी इस अभियान को नई गति दी।
इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम यह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में मिली यह सफलता उत्तराखंड के विकास की नई पहचान बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण साक्षरता से राज्य में रोजगार, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक विकास को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य केवल साक्षरता बनाए रखना ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आजीवन सीखने की संस्कृति को और अधिक मजबूत करना भी है।

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