हरेला के रंग में रंगा उत्तराखंड, पौधरोपण के साथ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
August 5, 2026
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उत्तराखंड

हरेला के रंग में रंगा उत्तराखंड, पौधरोपण के साथ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

देवभूमि उत्तराखंड आज हरेला पर्व की हरियाली और उत्साह में पूरी तरह रंगा नजर आया। पहाड़ से लेकर मैदान तक घर-घर में हरेला की शुभकामनाओं के साथ प्रकृति, संस्कृति और खुशहाली का यह लोकपर्व पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हरेला की पूजा की, एक-दूसरे को हरेला का आशीर्वाद दिया और प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। गांवों में लोकगीतों की गूंज सुनाई दी तो शहरों में भी लोगों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कुमाऊं अंचल का प्रमुख लोकपर्व हरेला सावन माह के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व नई फसल, हरियाली, समृद्धि और सुख-शांति का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरेला भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ है, जबकि कृषि परंपरा में इसे नई शुरुआत और अच्छी पैदावार का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि उत्तराखंड के लोगों के लिए हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इसे उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की भावना का प्रतीक बताया। उन्होंने सभी लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

प्रदेशभर में आज विभिन्न सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान भी चलाए गए। लोगों ने अपने घरों, विद्यालयों, मंदिर परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाकर हरित उत्तराखंड के संकल्प को मजबूत किया।

हरेला पर्व उत्तराखंड की उस संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जहां प्रकृति को पूजनीय माना जाता है और पर्यावरण संरक्षण जीवनशैली का हिस्सा है। बदलते समय में भी यह लोकपर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, प्रकृति के महत्व को समझाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य बनाने का प्रेरणादायक संदेश देता है। आज पूरे प्रदेश में हरेला का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और मजबूत हैं, जितनी सदियों पहले थीं।

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