केंद्र सरकार देश में जल्द ही दोपहिया सड़क एम्बुलेंस (टू-व्हीलर रोड एम्बुलेंस) शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (CMVR) में संशोधन का मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार करना है, ताकि इनके निर्माण, संचालन और सुरक्षा से जुड़े मानकों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सके।
सरकार का मानना है कि दोपहिया सड़क एम्बुलेंस ग्रामीण, दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं तेजी से उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे स्थानों पर जहां पारंपरिक चारपहिया एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती, वहां ये एम्बुलेंस मरीजों तक जल्दी पहुंचकर प्राथमिक उपचार और सुरक्षित परिवहन की सुविधा उपलब्ध करा सकेंगी।
फिलहाल केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को अलग वाहन श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसके कारण इनके निर्माण, कार्यात्मक सुरक्षा, मरीज परिवहन प्रणाली, प्रकार अनुमोदन (टाइप अप्रूवल), पंजीकरण और फिटनेस निरीक्षण के लिए कोई राष्ट्रीय मानक मौजूद नहीं हैं। प्रस्तावित संशोधन के तहत इन सभी कमियों को दूर करने के लिए AIS-209 (Part 1):2026 – लाइफ सपोर्टिंग टू-व्हीलर रोड एम्बुलेंस मानक को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
1 अक्टूबर 2027 से लागू होंगे नए मानक
मसौदा नियमों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद निर्मित एल2 (L2) श्रेणी की सभी दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के लिए AIS-209 (Part 1):2026 का अनुपालन अनिवार्य किया जाएगा। इसी तारीख से इन एम्बुलेंस पर लगाई जाने वाली आपातकालीन शीर्ष (टॉप) चेतावनी लाइटों को भी इसी मानक के अनुरूप होना होगा।
राज्य सरकारें तय करेंगी संचालन क्षेत्र
प्रस्ताव के अनुसार, दोपहिया सड़क एम्बुलेंस का पंजीकरण संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित क्षेत्रों में संचालन के लिए किया जा सकेगा। इससे राज्यों को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार इन सेवाओं का विस्तार करने में सुविधा मिलेगी।
हर दो साल में कराना होगा फिटनेस नवीनीकरण
सरकार ने प्रस्तावित किया है कि दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को परिवहन वाहन की श्रेणी में रखा जाएगा। इसलिए इनके लिए फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा और इसका नवीनीकरण प्रत्येक दो वर्ष में कराना होगा।
फिटनेस जांच में इन बिंदुओं की होगी विशेष जांच
फिटनेस निरीक्षण के दौरान एम्बुलेंस सहायक उपकरण या मरीज परिवहन इकाई की सुरक्षित स्थापना, टायर और रिम की स्थिति, आपातकालीन चेतावनी लाइटें, मरीज स्ट्रेचर और उसके लॉकिंग सिस्टम, मरीज सुरक्षा संयम प्रणाली, लोडिंग एवं अनलोडिंग तंत्र तथा अग्निशामक यंत्र की उपलब्धता, पहुंच और वैधता की जांच की जाएगी।
सुरक्षा और निर्माण के लिए तय किए गए मानक
AIS-209 (Part 1):2026 के तहत दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को एल2 श्रेणी का ऐसा वाहन माना गया है, जिसमें एम्बुलेंस सहायक इकाई या मरीज परिवहन प्रणाली लगी हो। इस मानक में वाहन की स्थिरता, ब्रेकिंग क्षमता, पार्किंग ब्रेक, चढ़ाई पर चलने की क्षमता (ग्रेडिबिलिटी), पीछे की दृश्यता, कपलिंग की मजबूती, आपातकालीन चेतावनी उपकरण, सुरक्षित मरीज लोडिंग, मरीज सुरक्षा प्रणाली और पर्यावरणीय जोखिमों से सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मिलेगी मजबूती
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित नियामक ढांचा दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के डिजाइन, निर्माण और संचालन में सुरक्षा तथा जवाबदेही को मजबूत करेगा। साथ ही यह उन इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता की गति बढ़ाएगा, जहां पारंपरिक एम्बुलेंस के पहुंचने में भौगोलिक या अन्य कारणों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
30 दिन तक मांगे गए सुझाव
मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना जारी होने की तिथि से 30 दिन की अवधि पूरी होने के बाद प्राप्त सभी टिप्पणियों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।

