यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। महाद्वीप के कई देशों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। शनिवार को जर्मनी, डेनमार्क और चेक गणराज्य में जून महीने के तापमान के नए रिकॉर्ड दर्ज किए गए, जबकि स्विट्जरलैंड में भी जून के इतिहास का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले इसी सप्ताह फ्रांस और ब्रिटेन में भी गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट चुके हैं।
यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जो सामान्य से कई डिग्री अधिक है। तेज धूप और लू जैसी परिस्थितियों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शहरों में लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है, जबकि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए विशेष स्वास्थ्य परामर्श जारी किए गए हैं।
जर्मनी के कई क्षेत्रों में शनिवार को अब तक का सबसे अधिक जून तापमान दर्ज किया गया। डेनमार्क और चेक गणराज्य में भी मौसम विभाग ने नए रिकॉर्ड की पुष्टि की है। वहीं, स्विट्जरलैंड में जून महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज होने से वैज्ञानिक भी चिंतित हैं। फ्रांस और ब्रिटेन में भी इस सप्ताह कई स्थानों पर रिकॉर्डतोड़ गर्मी देखी गई, जिससे रेलवे सेवाएं, बिजली आपूर्ति और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ।
भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ गया है। कई देशों में प्रशासन ने फायर अलर्ट जारी कर दिए हैं और लोगों से जंगलों या खुले इलाकों में आग जलाने से बचने की अपील की गई है। कृषि क्षेत्र पर भी गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। फसलों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में इस तरह की चरम मौसम घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार देखने को मिल रही हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी हीटवेव और अधिक तीव्र तथा लंबी अवधि की हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने सरकारों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया है।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप से बचने, हल्के कपड़े पहनने और दोपहर के समय अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। कई शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल और कूलिंग सेंटर की व्यवस्था भी की गई है ताकि लोगों को राहत मिल सके।
यूरोप में लगातार टूटते तापमान रिकॉर्ड इस बात का संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी आम होती जा सकती है।

