प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी उज्बेकिस्तान और किर्गिजस्तान यात्रा को मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे, जबकि 31 अगस्त और एक सितंबर को किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक की यात्रा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की यह चौथी यात्रा होगी। वहीं, बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में वह हिस्सा लेंगे। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात भी कर सकते हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब शंघाई सहयोग संगठन अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मना रहा है।
भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लगातार मजबूत करने पर जोर दे रहा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक समन्वय पर चर्चा होने की उम्मीद है।
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य भी क्षेत्रीय सुरक्षा और इन तीन प्रमुख चुनौतियों से मिलकर मुकाबला करना रहा है। ऐसे में संगठन के शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के लिए मध्य एशिया आर्थिक, सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उज्बेकिस्तान और किर्गिजस्तान के साथ बेहतर संबंधों के जरिए भारत इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता है। प्रधानमंत्री की यात्रा से दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

