भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को भारत लौटेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड का पहला आधिकारिक दौरा होगा।
क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस दौरे को लेकर खुशी जताते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है तथा न्यूजीलैंड के लिए एक अहम साझेदार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा, जिससे निर्यात, निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा अप्रैल में हुए ऐतिहासिक भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रहा है। इस समझौते पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी और केवल नौ महीनों में इसे अंतिम रूप दे दिया गया, जो भारत के सबसे तेज़ी से पूरे हुए व्यापार समझौतों में शामिल है।
इस समझौते के तहत भारत के 8,284 निर्यात उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। वहीं भारत को विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी, कोकिंग कोल और धातु स्क्रैप जैसे कच्चे माल बिना आयात शुल्क के उपलब्ध होंगे, जिससे उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। विशेष एग्रोटेक्नोलॉजी कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद जैसी फसलों के उत्पादन में न्यूजीलैंड की आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा।
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से भारत आने वाली लगभग 95 प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क समाप्त किया जाएगा। इससे वहां के निर्यातकों को ऊन, लकड़ी, वाइन, कोयला, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से बेचने का अवसर मिलेगा।
हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल तथा रत्न एवं आभूषण जैसे करीब 30 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि किसानों और छोटे व्यापारियों के हित सुरक्षित रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का ऑकलैंड दौरा न केवल भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा।
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