चावला गैंगरेप मामले में आरोपियों को सर्वोच्च अदालत से बरी किए जाने पर मुख्यमंत्री धामी, त्रिवेंद्र सिंह और हरीश रावत ने कहा- बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे लड़ाई - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
June 4, 2026
Daily Lok Manch
अपराध उत्तराखंड

चावला गैंगरेप मामले में आरोपियों को सर्वोच्च अदालत से बरी किए जाने पर मुख्यमंत्री धामी, त्रिवेंद्र सिंह और हरीश रावत ने कहा- बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे लड़ाई

चावला गैंगरेप मामले में उत्तराखंड के भाजपा और कांग्रेस नेताओं में भारी आक्रोश है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देवभूमि की बेटी को न्याय दिलाने के लिए खुलकर पैरवी की है। सोमवार को ‌चावला गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कहा कि कोर्ट ने जो फैसला किया है, उस पर मैंने एडवोकेट चारू खन्ना से बात की है, जो केस देख रही हैं। साथ ही केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू से भी बात की है। उन्होंने कहा कि पीड़िता प्रदेश की ही हमारे देश की बेटी है और उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। वहीं पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने में सरकार को सहयोग करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के छावला इलाके में 2012 में उत्तराखंड के पौड़ी निवासी 19 वर्षीय युवती का अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में मौत की सजा पाए तीन आरोपियों को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से उत्तराखंड में पहाड़ की बेटी के हत्यारों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग गम और गुस्से के साथ अपनी बात रख रहे हैं। सरकार से भी मांग की जा रही है कि वो इस मामले में बेटी को न्याय दिलाने के लिए पहल करे। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा कि यह हत्याकांड निर्भया हत्याकांड की भांति वीभत्स था।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि लचर पैरवी के चलते ऐसे जघन्य अपराधियों का छूटना समाज के लिए चिंतनीय है। दिल्ली में उत्तराखंड की 19 वर्षीय बेटी के साथ हैवानियत हुई। आरोपितों को बरी किया गया, स्तब्ध हूं। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि निर्भया कांड में तमाम आरोपितों को सजा मिली थी, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होना खेद का विषय है। इस मामले पर उत्तराखंड के प्रवासी संगठनों से बातचीत कर आगे संयुक्त रूप से लड़ाई जारी रखने के प्रयास किए जाएंगे।

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