देश के बड़े हिस्से में जुलाई के मध्य में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के अधिकांश इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक बारिश की गतिविधियां सामान्य से कम रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को “मानसून ब्रेक” जैसी परिस्थिति मान रहे हैं। वर्ष 2015 और 2021 के बाद यह तीसरा अवसर है जब जुलाई के दौरान मानसून की सक्रियता में इतनी बड़ी कमी देखने को मिली है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
बारिश की कमी का असर कई राज्यों में साफ दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में इस बार मानसूनी सीजन के दौरान जुलाई में पहली बार सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक 241.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 250.1 मिलीमीटर मानी जाती है। यानी राज्य में अब तक लगभग तीन प्रतिशत कम बारिश हुई है।
उत्तर प्रदेश में भी मानसून कमजोर बना हुआ है। एक जून से 13 जुलाई तक राज्य में 161.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 199.7 मिलीमीटर है। इस प्रकार प्रदेश में करीब 19 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है और खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
राजस्थान में भी मानसून की रफ्तार थम गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के किसी भी हिस्से में उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं की गई। श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल राज्य में व्यापक बारिश की संभावना कम है।
दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बिहार, असम, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें तथा संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में कुमे नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण भारत-चीन सीमा (एलएसी) के पास स्थित टापा बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 15 जवानों से संपर्क टूट गया। सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन उनकी तलाश में जुटे हुए हैं।
असम के टियोक क्षेत्र में पुथी नदी का तटबंध टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं। बड़ी मात्रा में कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जबकि कई सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। वहीं उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में मानसून के कमजोर रहने के कारण लोगों को अभी कुछ दिन और बारिश का इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों और जल संसाधनों पर इसका असर पड़ने की आशंका के बीच मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

