उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए 17 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) का पंजीकरण समाप्त कर दिया है। आयोग की जांच में ये दल पिछले छह वर्षों से चुनावी गतिविधियों से दूर पाए गए और कई अपने पंजीकृत पते पर भी नहीं मिले। इस कार्रवाई के बाद राज्य में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों की संख्या 42 से घटकर 25 रह गई है।
वहीं, राज्य में सात नए राजनीतिक दलों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। खानपुर विधायक उमेश कुमार की जन निर्माण पार्टी का पंजीकरण हो चुका है, जबकि छह अन्य दलों के आवेदन प्रक्रिया में हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि उत्तराखंड की राजनीति में नए दल अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि निष्क्रिय दल चुनावी परिदृश्य से बाहर हो रहे हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, लगातार छह वर्षों तक किसी चुनाव में भाग नहीं लेने, आयोग के नोटिसों का जवाब नहीं देने, पंजीकृत पते पर पार्टी का अस्तित्व नहीं मिलने तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने जैसे कारणों के चलते यह कार्रवाई की गई है। इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
जिन 17 राजनीतिक दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया, उनमें शामिल हैं—
भारतीय जनक्रांति पार्टी, देहरादून
हमारी जनमंच पार्टी, देहरादून
मैदानी क्रांति दल, देहरादून
राष्ट्रीय जन सहाय दल, देहरादून
उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी, देहरादून
भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी, देहरादून
भारतीय अंत्योदय पार्टी, देहरादून
भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी, देहरादून
गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट, देहरादून
राष्ट्रीय ग्राम विकास पार्टी, रुड़की
भारत कौमी दल, हरिद्वार
पीपुल्स पार्टी, रुड़की
भारत परिवार पार्टी, हरिद्वार
भारतीय सम्राट सुभाष सेना, हरिद्वार
प्रजामंडल पार्टी, श्रीनगर गढ़वाल
प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया, रामनगर
सुराज सेवा दल, हल्द्वानी
चुनाव पर क्या होगा असर?
इस फैसले से चुनाव चिह्नों और बैलेट प्रबंधन में व्यवस्था बेहतर होगी। केवल कागजों पर मौजूद दलों पर रोक लगेगी और सक्रिय राजनीतिक दलों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। साथ ही नए दलों को राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने का अवसर मिलेगा।

