देश में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगे कच्चे तेल के दबाव के बीच अब सरकार ने ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाने की दिशा में बड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को बेहद छोटे काफिले के साथ बाहर निकले। जहां आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में 12 से 15 गाड़ियां शामिल रहती हैं, वहीं इस बार सिर्फ दो गाड़ियां ही नजर आईं। एक गाड़ी में स्वयं प्रधानमंत्री मौजूद थे, जबकि दूसरी में एसपीजी और सुरक्षा कर्मी तैनात रहे।
प्रधानमंत्री लगातार देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील कर रहे हैं। उनके इस संदेश का असर अब केंद्र और राज्यों की सरकारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटा दी है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने काफिले में कटौती के निर्देश दिए। पहले जहां उनके साथ 14 से 16 गाड़ियां चलती थीं, वहीं दिल्ली दौरे के दौरान बुधवार को केवल 5 गाड़ियां ही उनके काफिले में शामिल रहीं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने तो ईंधन बचत को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सात अहम फैसलों का ऐलान किया। इसके तहत मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अधिकारियों के काफिले 50 प्रतिशत तक घटाए जाएंगे। साथ ही सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन, बस या मेट्रो से सफर करने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
सरकारी बैठकों को भी डिजिटल मोड पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। सभी सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप अब वर्चुअल माध्यम से आयोजित होंगी, जबकि सचिवालय की आधी बैठकें ऑनलाइन की जाएंगी। बड़ी कंपनियों को भी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की एडवाइजरी जारी करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री योगी ने जनता से भी कई अपीलें की हैं। उन्होंने सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाने, बिजली और पेट्रोल-डीजल बचाने तथा सजावटी लाइटों का कम उपयोग करने की सलाह दी। दिल्ली में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भी मेट्रो और ई-रिक्शा से सफर कर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो दिनों में अलग-अलग कार्यक्रमों में देशवासियों से ईंधन बचत, कारपूलिंग, मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग की अपील की। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने, सोने की खरीद कम करने और खाने के तेल की खपत घटाने का भी आग्रह किया है।
सरकार अब सिर्फ अपीलों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नेताओं और अधिकारियों के जरिए उदाहरण पेश कर यह संदेश देना चाहती है कि संकट के समय संसाधनों की बचत ही सबसे बड़ी देशसेवा है।

