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October 11, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत छलांग, GDP वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही


वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो सरकार के दूसरे एडवांस अनुमान 7.6 प्रतिशत से अधिक रही। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा गुरुवार शाम जारी आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को रेखांकित किया है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष 2024-25 में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही थी। इसके मुकाबले 2025-26 में दर्ज 7.7 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग, सरकारी निवेश और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि यह तीसरी तिमाही में दर्ज 8 प्रतिशत की वृद्धि दर से थोड़ी कम रही। इसके बावजूद चौथी तिमाही का प्रदर्शन मजबूत माना जा रहा है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता का संकेत मिलता है।

आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में वृद्धि दर में आई मामूली कमी का प्रमुख कारण विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की रफ्तार में गिरावट रही। तीसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 12.8 प्रतिशत थी, जो चौथी तिमाही में घटकर 7.3 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद सेवा क्षेत्र और अन्य प्रमुख आर्थिक गतिविधियों ने समग्र विकास दर को मजबूत बनाए रखा।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। देश में बढ़ते निवेश, बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च और उपभोग में सुधार ने आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान की है।

सरकार का दावा है कि आर्थिक सुधारों, डिजिटलीकरण, विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों और निवेश-अनुकूल वातावरण का सकारात्मक प्रभाव देश की विकास दर पर दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।

यदि औद्योगिक उत्पादन और निर्यात क्षेत्र में और मजबूती आती है, तो अगले वित्त वर्ष में भी भारत उच्च विकास दर बनाए रखने में सफल हो सकता है। फिलहाल जारी GDP आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी विकास की गति बरकरार है।

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