Video 40 दिन में योगी दें ‘हिंदू होने का प्रमाण’, वरना गेरुआ सिर्फ दिखावा : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
July 29, 2026
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Video 40 दिन में योगी दें ‘हिंदू होने का प्रमाण’, वरना गेरुआ सिर्फ दिखावा : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज में संगम स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने नई और कड़ी मांग रखी है। काशी से बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि योगी सरकार 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्य पशु (या राज्य माता) घोषित करे, अन्यथा यह माना जाएगा कि गेरुआ वस्त्र केवल दिखावे के लिए पहना गया है।

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि अब क्षमायाचना की बात पीछे छूट चुकी है। उन्होंने कहा कि जब वे 10–11 दिनों तक प्रयागराज में बैठे रहे, तब भी समाधान के प्रयास हुए, लेकिन बात नहीं बनी। अब 10–11 मार्च को वे संत समाज के साथ लखनऊ जाएंगे और अपनी मांगें सरकार के सामने रखेंगे। गोहत्या बंद करने और गोसेवा को हिंदुत्व की पहली सीढ़ी बताते हुए उन्होंने 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

संगम स्नान विवाद की पृष्ठभूमि
मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर बैठकर दलबदल के साथ संगम स्नान करना चाहते थे, लेकिन माघ मेला प्रशासन ने प्रोटोकॉल का हवाला देकर पालकी के साथ आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इसके बाद शंकराचार्य 11 दिन तक अनशन पर रहे और फिर बिना स्नान किए भारी मन से वाराणसी लौट गए।

यूजीसी नियमों पर भी जताया विरोध
शंकराचार्य ने यूजीसी के नए नियमों का भी विरोध किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें फूलों की वर्षा या विशेष सम्मान की चाह नहीं है, लेकिन बटुकों, संतों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए।

‘हमने शंकराचार्य होने का प्रमाण दिया, अब सरकार दे’
वाराणसी पहुंचने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनसे 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था, जो उन्होंने समय पर दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद गोहत्या नहीं रुकी। अब वे सरकार से ‘हिंदू होने का प्रमाण’ मांगते हैं। उन्होंने कहा कि गोसेवा और गोरक्षा हिंदुत्व की बुनियाद है और योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों के भीतर इसे साबित करना होगा।

प्रशासन का प्रस्ताव और असहमति
सूत्रों के मुताबिक, विवाद सुलझाने के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव दिया था कि शंकराचार्य जब भी स्नान के लिए जाएंगे, उन्हें ससम्मान पालकी के साथ ले जाया जाएगा, अधिकारी स्वागत में मौजूद रहेंगे और पुष्पवर्षा भी होगी। हालांकि शंकराचार्य ने कहा कि प्रस्ताव में गलती के लिए क्षमा का शब्द नहीं था, जबकि संतों और साधु-संन्यासियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ था।

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