फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैं में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया की निगाहें उस समय भारत और अमेरिका पर टिक गईं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने बाद आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच करीब पांच मिनट तक बातचीत हुई और वे सम्मेलन के दौरान एक साथ बैठे भी नजर आए। माना जा रहा है कि इस मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों को नई गति देने का संकेत दिया है।
G-7 सम्मेलन में सदस्य देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के शीर्ष नेता शामिल हुए। इसके अलावा यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया। मेजबान देश फ्रांस ने भारत समेत कई महत्वपूर्ण साझेदार देशों को भी आमंत्रित किया। आमंत्रित नेताओं में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो शामिल रहे।
मंगलवार दोपहर एवियन पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद आयोजित समूह फोटो सत्र में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने एक साथ तस्वीर खिंचवाई। इस दौरान मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से बातचीत करते दिखाई दिए।
पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात को विशेष महत्व इसलिए भी दिया जा रहा है क्योंकि दोनों नेताओं की पिछली आमने-सामने की बैठक फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। करीब 16 महीने बाद हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर बातचीत तेज हो रही है। दोनों नेता ट्रेड डील, टैरिफ, निवेश, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं।
व्हाइट हाउस के मुताबिक भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।
इस वर्ष G-7 सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दे सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं। ऐसे में भारत की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज के रूप में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
क्या है एवियन-ले-बैं?
एवियन-ले-बैं फ्रांस के पूर्वी हिस्से में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन और स्पा शहर है। यह स्विट्जरलैंड की सीमा के निकट जिनेवा झील के किनारे बसा हुआ है और अपने प्राकृतिक खनिज जल स्रोतों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और उच्चस्तरीय सुविधाओं के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए उपयुक्त स्थान माना जाता है। यही वजह है कि फ्रांस ने 2026 के G-7 सम्मेलन की मेजबानी के लिए इस ऐतिहासिक शहर का चयन किया।
G-7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी और विश्व नेताओं के साथ उनकी लगातार बैठकों को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। वहीं मोदी-ट्रम्प मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों में नए अध्याय की संभावनाओं को भी मजबूत किया है।

