प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और सरकारी खर्च कम करने की अपील का असर अब देशभर के राज्यों में दिखाई देने लगा है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगे पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा संकट के बीच कई राज्य सरकारों ने प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। कहीं वीवीआईपी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाई जा रही है तो कहीं सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा रहा है।

देश के अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्री और राज्यपाल अब खुद सादगी और बचत का संदेश देते नजर आ रहे हैं। सरकारी फिजूलखर्ची कम करने, ईंधन की बचत करने और आम जनता को सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से कई अहम फैसले लिए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी बुधवार को अपने लंबे काफिले की जगह केवल दो गाड़ियों के साथ सफर कर इस मुहिम को नई दिशा दी। आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में 12 से 15 वाहन शामिल रहते हैं।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में वीआईपी काफिलों में वाहनों की संख्या कम कर दी गई है। वहीं त्रिपुरा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ग्रुप C और D के केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही रोज ऑफिस बुलाने का निर्णय लिया है, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकार ने विभागों को साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने के साथ सप्ताह में एक दिन बिना गाड़ी के चलने का फैसला लिया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने भी जिला दौरों में काफिले की गाड़ियां 50 प्रतिशत तक कम कर दी हैं और मंत्रियों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
पंजाब में राज्यपाल Gulab Chand Kataria ने हर बुधवार अधिकारियों के चार-पहिया वाहन से दफ्तर नहीं आने का फैसला लिया है। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने अपने काफिले को 14-16 गाड़ियों से घटाकर सिर्फ 5 वाहनों तक सीमित कर दिया है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi के काफिले में अब केवल चार गाड़ियां रह गई हैं, जिनमें दो पुलिस वाहन शामिल हैं। बिहार में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary इलेक्ट्रिक वाहन से सचिवालय पहुंचे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भी वीआईपी काफिलों में वाहनों की संख्या सीमित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारों का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों के जरिए न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी खर्च में कटौती की दिशा में भी बड़ा संदेश जाएगा।

