वैश्विक संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा बचत, आत्मनिर्भरता और सतत विकास को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में आम जनता से लेकर सरकारी विभागों तक ऊर्जा और संसाधनों की बचत को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।




सरकार ने साफ किया कि कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पूरी दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा है, जहां ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में उत्तराखंड सरकार ने छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों के जरिए बड़े स्तर पर बचत और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है।
कैबिनेट बैठक में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” लागू करने और सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती जैसे अहम निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन फ्लीट में वाहनों की संख्या आधी की जाएगी, जबकि सरकारी बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। आम लोगों को भी सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी पॉलिसी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब नए सरकारी वाहनों की खरीद में 50 प्रतिशत वाहन इलेक्ट्रिक होंगे और चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जाएगा। साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी भवनों में पीएनजी और सौर ऊर्जा के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
खाद्य तेल की खपत कम करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। “मेरा भारत, मेरा योगदान” और “मेड इन स्टेट” जैसे अभियानों के जरिए लोगों को स्वदेशी और बचत आधारित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसके अलावा कैबिनेट ने पहाड़ों में स्वैच्छिक चकबंदी नीति को मंजूरी, होम स्टे नियमावली में संशोधन, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में नए पदों की स्वीकृति और पंचायत भवनों के लिए धनराशि बढ़ाने समेत कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई।

