उत्तराखंड की राजनीति में 4 जुलाई 2026 एक ऐतिहासिक तारीख के रूप में दर्ज हो गई । ठीक पांच वर्ष पहले, 4 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी ने पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोबारा सत्ता हासिल की और धामी लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने। दोनों कार्यकालों को मिलाकर उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने लगातार पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही वह उत्तराखंड के गठन के बाद भारतीय जनता पार्टी के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने लगातार पांच वर्षों तक राज्य की कमान संभाली है। हालांकि, यदि पूरे उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी थे, जिन्होंने वर्ष 2002 से 2007 तक बिना किसी नेतृत्व परिवर्तन के अपना कार्यकाल पूरा किया था। भाजपा के अब तक के कार्यकाल में यह रिकॉर्ड पहली बार पुष्कर सिंह धामी के नाम दर्ज हुआ है। यही वजह है कि यह दिन भाजपा और मुख्यमंत्री धामी, दोनों के लिए विशेष राजनीतिक महत्व रखता है। उत्तराखंड के (करीब 26 वर्षों) के राजनीतिक सफर में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ मुख्यमंत्री बदलने की राजनीति भी लगातार चर्चा का विषय रही है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों की सरकारों में अलग-अलग परिस्थितियों में कई बार नेतृत्व परिवर्तन हुआ। विशेष रूप से भाजपा सरकारों में कोई भी मुख्यमंत्री लगातार पांच वर्ष तक पद पर नहीं रह सका। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में पुष्कर सिंह धामी का लगातार पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री बने रहना न केवल भाजपा के लिए एक नया रिकॉर्ड है, बल्कि इसे राज्य की राजनीति में स्थिर नेतृत्व के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी का पहला कार्यकाल जुलाई 2021 में उस समय शुरू हुआ, जब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी। उनके सामने सरकार की छवि मजबूत करने, संगठन को चुनावी मोड में लाने और जनता के बीच भरोसा कायम रखने जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। धामी के नेतृत्व में भाजपा ने वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। हालांकि धामी अपनी विधानसभा सीट हार गए थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया। बाद में उन्होंने चंपावत विधानसभा उपचुनाव जीतकर सदन की सदस्यता हासिल की और अपने दूसरे कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत की। धामी सरकार के पांच साल पूरे होने के अवसर पर राज्य सरकार ने 4 जुलाई से 10 जुलाई तक पूरे प्रदेश में ‘सेवा सप्ताह’ मनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान सभी जिलों में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, महिला सशक्तीकरण, उद्योग और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चिकित्सा शिविर, दिव्यांगजन सहायता शिविर, खेल प्रतियोगिताएं, मैराथन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का पंजीकरण भी किया जाएगा। वहीं राजस्व विभाग विशेष लोक अदालत समाधान शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का निस्तारण करेगा। दूसरी ओर भाजपा संगठन भी इस मौके को विशेष रूप से मना रहा है। प्रदेशभर में सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनसंपर्क अभियान, संगोष्ठियां और विभिन्न संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता सरकार के पांच वर्षों के कार्यों और जनहित में लिए गए फैसलों को जनता तक पहुंचाएंगे। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां मुख्यमंत्री बदलना लंबे समय तक राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा रहा, वहां पुष्कर सिंह धामी का लगातार पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री बने रहना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भाजपा के लिए राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक भी है। यही वजह है कि 4 जुलाई भाजपा और मुख्यमंत्री धामी, दोनों के लिए एक यादगार तारीख बन गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच वर्ष पूरे होने पर भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व, केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। नेताओं ने इसे उत्तराखंड के विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए धामी के नेतृत्व में प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह अपने कार्यकाल की तुलना किसी पूर्व मुख्यमंत्री से नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनसे पहले प्रदेश का नेतृत्व करने वाले सभी मुख्यमंत्री अनुभव और उम्र, दोनों में उनसे वरिष्ठ रहे हैं और उनसे उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला । मुख्यमंत्री धामी ने कहा, मेरे से पहले प्रदेश में जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, वे सभी बहुत अनुभवी थे। सभी पूर्व मुख्यमंत्री अनुभव और उम्र में मुझसे बड़े थे। उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। यहां कोई प्रतिस्पर्धा की बात नहीं है, क्योंकि हर पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने-अपने समय में प्रदेश के लिए काम किया और मुझे उनसे प्रेरणा मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ने की चर्चाओं पर धामी ने विनम्रता से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसे किसी तरह की प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखते। उन्होंने कहा, कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ने जा रहा हूं, लेकिन मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। जब एनडी तिवारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके पास सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव था। वहीं, जब मैं मुख्यमंत्री बना, तब मैं अपेक्षाकृत नया था। इसलिए रिकॉर्ड या प्रतिस्पर्धा जैसी कोई बात नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी से लेकर अब तक प्रदेश का नेतृत्व करने वाले सभी मुख्यमंत्रियों ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक नेता के कार्यकाल से उन्हें कुछ न कुछ सीखने को मिला और उन्हीं अनुभवों ने उन्हें बेहतर ढंग से काम करने की प्रेरणा दी। सीएम धामी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी रिकॉर्ड को बनाना या तोड़ना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनकल्याण के लिए निरंतर काम करना है। यही प्रयास आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा।

धामी सरकार के इन बड़े फैसलों ने बदली उत्तराखंड की सियासत और पहचान—
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों के दौरान उत्तराखंड सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने न केवल राज्य की राजनीति की दिशा बदली बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड को नई पहचान दिलाई। कानून-व्यवस्था को मजबूत करने से लेकर महिलाओं के अधिकार, युवाओं के भविष्य, निवेश, रोजगार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई तक, धामी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनकी देशभर में चर्चा हुई। सबसे महत्वपूर्ण फैसला समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का रहा। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां यूसीसी लागू की गई। सरकार का दावा है कि इस कानून से सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। भाजपा ने इसे अपने प्रमुख वैचारिक वादों में शामिल किया था और धामी सरकार ने इसे लागू कर राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई।युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए बनाए गए इस कानून में दोषियों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी और लाखों युवाओं का सरकारी नौकरियों पर भरोसा मजबूत हुआ। भर्ती परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न कराकर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि प्रतिभा के आधार पर ही चयन होगा। महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में भी धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को सरकारी सेवाओं में अधिक अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी। इस निर्णय का व्यापक स्वागत हुआ और इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया। धामी सरकार ने भ्रष्टाचार, भू-माफिया और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी सख्त अभियान चलाया। विभिन्न सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई, सतर्कता जांच और अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई जैसे कदम सरकार की सख्त प्रशासनिक छवि का हिस्सा बने। सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि भ्रष्टाचार के प्रति उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति केवल घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू की गई है। राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भी धामी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है। इस आयोजन में देश-विदेश की कई कंपनियों ने निवेश प्रस्ताव दिए। धामी सरकार का कहना है कि इन निवेश समझौतों के जरिए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसके साथ ही स्वरोजगार योजनाओं, स्टार्टअप नीति और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी सरकार ने लगातार काम किया। चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को मजबूत करने, हवाई और सड़क संपर्क बेहतर बनाने, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाएं शुरू की गईं। सरकार ने धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक विकास और ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने को अपनी प्राथमिकताओं में रखा। इन फैसलों और पहलों के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहचान केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में बनी, जिन्होंने कम समय में कई बड़े और चर्चित फैसले लेकर अपनी अलग कार्यशैली स्थापित की। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके पांच वर्ष पूरे होने को भाजपा और सरकार दोनों एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।

पांच साल पूरे होने पर बोले सीएम धामी- हर दिन उत्तराखंड की सेवा के नाम–
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार, 4 जुलाई को ऋषिकेश से राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के लगातार पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने कहा कि इन वर्षों में उन्होंने कभी यह नहीं गिना कि कितने दिन, महीने या साल बीत गए। उनका पूरा ध्यान केवल उत्तराखंड की सेवा, जनकल्याण और राज्य के विकास पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से उत्तराखंड ने विकास के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और सरकार वर्ष 2035 तक विकसित उत्तराखंड बनाने के लक्ष्य की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग उनसे पूछते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल पूरे होने पर उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। इस पर उन्होंने कहा, “मां गंगा और भगवान महादेव को साक्षी मानकर कहता हूं कि मैंने इन पांच वर्षों में कभी दिन, महीना या साल नहीं गिना। मेरा हर दिन केवल उत्तराखंड की सेवा और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए समर्पित रहा है।” उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने उन्हें लगातार काम करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने पिछले पांच वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने पूरे देश में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया। धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून और मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन जैसे फैसले भी राज्य सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार उपलब्ध कराया। महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया, जबकि निवेश और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सीएम धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को मजबूत करने, धार्मिक एवं पर्यटन अवसंरचना का विस्तार, होमस्टे योजना को बढ़ावा, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए प्रयास और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन को भी उत्तराखंड की बड़ी उपलब्धियों में शामिल बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा उत्तराखंड का साथ दिया। केंद्र सरकार के सहयोग से कई ऐसी विकास परियोजनाएं आगे बढ़ीं, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वय का ही परिणाम है कि राज्य में सड़क, रेल, हवाई संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से काम हुआ है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को जनसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का हर निर्णय प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर लिया गया है और आगे भी यही संकल्प बना रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दूसरे चरण का उद्देश्य सरकार को जनता के और करीब ले जाना है। अभियान के तहत विभिन्न विभाग गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे, पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ेंगे और सरकारी सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी, सुशासन और विकास के इसी मॉडल के बल पर उत्तराखंड वर्ष 2035 तक विकसित राज्य बनने का लक्ष्य अवश्य हासिल करेगा।
चुनावी साल से पहले एक्शन मोड में धामी सरकार, विकास और बड़े फैसलों पर पूरा फोकस–
उत्तराखंड में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पूरी तरह चुनावी तैयारी के साथ विकास कार्यों को गति देने में जुट गई है। सरकार एक ओर लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दे रही है, तो दूसरी ओर जनहित से जुड़े फैसलों और नई योजनाओं के जरिए जनता तक अपनी पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके समानांतर भाजपा संगठन भी बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरे करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि चुनाव से पहले विकास कार्यों का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके। हाल के महीनों में सरकार ने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं में तेजी लाई है। धामी सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में लिए गए बड़े फैसलों को भी जनता के बीच प्रमुखता से रख रही है। इनमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां, निवेश को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, धार्मिक पर्यटन और चारधाम यात्रा की सुविधाओं का विस्तार तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहल प्रमुख हैं। सरकार का दावा है कि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा होमस्टे योजना, सौर ऊर्जा परियोजनाएं, रोपवे, नई सड़कें, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम किया जा रहा है। वहीं, भाजपा संगठन भी चुनावी तैयारियों को धार देने में जुट गया है। प्रदेश स्तर से लेकर मंडल और बूथ स्तर तक संगठनात्मक बैठकों का दौर जारी है। कार्यकर्ताओं को सरकार की उपलब्धियां घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर 4 जुलाई से 10 जुलाई तक आयोजित ‘सेवा सप्ताह’ के जरिए भी सरकार और संगठन जनता के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में विकास, स्थिर नेतृत्व और सुशासन को प्रमुख मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार का फोकस केवल चुनाव नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को हासिल करना है। हालांकि चुनावी मुकाबले में कांग्रेस समेत विपक्षी दल भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति और अधिक सक्रिय होने के संकेत हैं। फिलहाल भाजपा सरकार विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारने, जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है, ताकि चुनावी वर्ष में प्रदर्शन और विकास दोनों को अपने पक्ष में मजबूत आधार बनाया जा सके।

